अखिल भारतीय किसान सभा ने राज्य व केंद्र सरकार पर किसान व जनविरोधी नीतियां अपनाने का आरोप लगाया है। इस मौके पर केंद्रीय व राज्य कृषि मंत्री को छह सूत्री मांग पत्र भी भेजा गया। इसमें महिलाओं को प्रति नाली के हिसाब से मानदेय देने की मांग की गई है।
यहां आयोजित एक दिवसीय जिला सम्मेलन में किसान सभा के राज्य कंट्रोल कमीशन के अध्यक्ष डा. गिरधर पंडित ने कहा कि मोदी सरकार किसानों के हितों की नहीं बल्कि कारपोरेट घरानों की चिंता कर रही है। कहा कि भूमि अधिग्रहण अधिनियम 2013 में बार-बार संशोधन कर केंद्र सरकार उसे लागू करने की कोशिशें कर रही हैं।
किसान सभा के प्रदेश संयोजक ललिता प्रसाद भट्ट ने कहा कि प्रदेश में जंगली जानवरों और सूखे से फसलें चौपट होने के बाद भी सरकार किसानों की सुध नहीं ले रही है। जिला मंत्री जयनारायण नौटियाल ने कहा कि रुद्रप्रयाग जिले को जैविक जिला घोषित करने के बाद भी आलू व तोर दाल की बुआई के लिए जैविक खाद व कीटनाशक काश्तकारों को नहीं मिल पाई हैं।
अन्य वक्ताओं का कहना था कि महिलाएं पहाड़ की रीढ़ हैं। ऐसे में उनके सामाजिक व आर्थिक विकास के लिए कृषि में नाली के हिसाब से मानदेय दिया जाना चाहिए। बैठक के बाद किसान सभा ने केंद्रीय व राज्य कृषि मंत्री को छह सूत्री मांगों का ज्ञापन भी भेजा। ज्ञापन में प्रदेश को सूखाग्रस्त घोषित करने, काश्तकारों को आर्थिक मदद देने, उत्तराखंड की फसलों को मुख्य फसल का दर्जा देने, जंगली जानवरों के निजात के लिए ठोस प्रयास करने पेयजल व लघु सिंचाई व्यवस्था करने की मांग की है।
निर्णय लिया गया कि मार्च में जखोली में सभा का राज्यस्तरीय सम्मेलन होगा। सभा में महावीर सिंह नेगी, सत्य प्रसाद भट्ट, सविता देवी, बुरांशी देवी, स्वरूप सिंह राणा आदि थे।