अलकनंदा और मंदाकिनी के संगम पर बसे रुद्रप्रयाग में शिक्षा, स्वास्थ्य सेवाओं को स्थापित करने वाले 108 स्वामी सच्चिदानंद को स्वाथ्य महकमा भूल गया है। जिला पंचायत स्तर पर प्रस्ताव पारित करने के बाद भी जिला अस्पताल के गेट और ओपीडी पर्ची पर स्वामी जी का नाम अंकित नहीं हो पाया है। विभाग और शासन स्तर पर हो रही उदासीनता को लेकर लोगों में रोष है।
रुद्रप्रयाग नगर के निर्माण और जरूरी सुविधाएं जुटाने में अहम भूमिका निभाने वाली विभूतियों के प्रति सरकारी महकमें सजग नहीं है। जिस अस्पताल की नींव 108 स्वामी सच्चिदानंद ने रखी, उसी को आज विभाग भूल गया है। बीते वर्ष जिला पंचायत की बैठक में यह निर्णय लिया गया था कि जिला चिकित्सालय का नाम अब स्वामी 108 सच्चिदानंद राजकीय जिला चिकित्सालय रुद्रप्रयाग होगा। यह नाम वाह्य रोगी पंजीकरण पर्ची पर भी अंकित होगा।
इस संबंध में प्रस्ताव तैयार कर अन्य जरूरी औपचारिकताओं के साथ मुख्य चिकित्साधिकारी को फाइल भेजी गई। सीएमओ ने भी फाइल स्वास्थ्य महानिदेशालय को भेजी। बावजूद इसके अब तक कोई कार्रवाई नहीं हो पाई है। वरिष्ठ पत्रकार रमेश पहाड़ी कहते हैं स्वामी सच्चिदानंद ने रुद्रप्रयाग की नींव रखी थी। उन्हीं की देन है कि यहां आज लोगों को जरूरी सुविधाएं मिल रही है। सरकारी तंत्र द्वारा उन्हें भुलाना ठीक नहीं है।
जिला पंचायत उपाध्यक्ष लखपत सिंह भंडारी का कहना है कि स्वामी सच्चिदानंद के नाम को लेकर सबसे पहले चर्चा जिला पंचायत की बैठक में उन्होंने ही की थी। प्रस्ताव तैयार कर सदस्यों ने अपनी मंजूरी भी दे दी थी। बावजूद इसके स्वास्थ्य विभाग और शासन की ओर से कोई कार्रवाई नहीं की जा रही है। इधर, व्यापार संघ के जिला संगठन महामंत्री केपी नौटियाल का कहना है कि अगर स्वामी जी का नाम अस्पताल व पर्ची पर अंकित करने से वे लोगों के लिए हमेशा जीवंत रहते।
जिला पंचायत से मिले प्रस्ताव को स्वास्थ्य महानिदेशालय को भेजा जा चुका है। वहां से अब तक इस संबंध में कोई पत्र नहीं मिला है। पुन: पत्राचार के माध्यम से इस बारे में जानकारी ली जाएगी।
- डा. आरपी बडोनी, सीएमओ, रुद्रप्रयाग