आपदा के ढाई वर्ष बाद भी कालीमठ पैदल पुल का निर्माण पूरा नहीं हो पाया है। लोनिवि ऊखीमठ के अधिकारियों के सामने सीएम हरीश रावत के निर्देश भी बौने साबित हो रहे हैं।
सीएम ने कालीमठ घाटी के भ्रमण के दौरान लोनिवि को फरवरी माह तक पुल निर्माण पूरा कर इससे आवाजाही के निर्देश दिए थे, लेकिन डेडलाइन समाप्त होने के बावजूद पुल का निर्माण पूरा नहीं हो पाया है। जून 2013 में सरस्वती नदी में आई बाढ़ से कालीमठ मंदिर व गांव को जोड़ने वाला पैदल पुल ध्वस्त हो गया था। ग्रामीणों ने आवाजाही के लिए नदी के ऊपर लकड़ी का वैकल्पिक पुल बनाया था। इससे ही ग्रामीण व कालीमठ मंदिर के दर्शनों को आने वाले श्रद्धालु आवाजाही कर रहे हैं।
ग्राम प्रधान गीता राणा, सामाजिक कार्यकर्ता शूरवीर सिंह ने बताया कि मुख्यमंत्री हरीश रावत ने भी कालीमठ मंदिर के दर्शन के दौरान अधिकारियों को फरवरी तक पुल का निर्माण पूरा कर आवाजाही संचालित करने के निर्देश दिए थे। तब विभाग ने कुछ समय तक तेजी से काम कराया भी, लेकिन एक माह से काम की रफ्तार बेहद सुस्त है। इससे पुल का निर्माण पूरा नहीं हो पाया है। उन्होंने बताया कि आगामी माह से नवरात्र शुरू हो रहे हैं, ऐसे में पुल नहीं होने से श्रद्धालुओं व स्थानीय लोगों को परेशानी उठानी पड़ेगी। इधर, लोनिवि के सहायक अभियंता संदीप सेमवाल ने बताया कि फरवरी में कुछ समय मौसम खराब होने से काम में देरी हुई है। उन्होंने कहा कि नवरात्र से पहले काम पूरा कर पुल से आवाजाही शुरू कर दी जाएगी।