मां मनणा माई की जयकारों से पूरा क्षेत्र शुक्रवार को गुंजायमान रहा और फिर राकेश्वरी मंदिर रांसी (ऊखीमठ) में सुबह सात बजे वैदिक पूजा-अर्चना के साथ मां मनणा माई की पांच दिवसीय लोकजात शुरू हुई। श्रद्धालुओं ने आराध्य देवी की डोली के साथ मंदिर से प्रस्थान किया और देर शाम को पहले पड़ाव थौली पहुंची। यात्रा में केदारघाटी, मद्महेश्वर घाटी व अन्य क्षेत्रों के 10 से अधिक श्रद्धालु शामिल हैं।
शुक्रवार को तड़के से राकेश्वरी मंदिर में पुजारी ईश्वरी भट्ट व मनेंद्र भट्ट ने मां राकेश्वरी व मनणा माई की पूजा-अर्चना शुरू की। वैदिक मंत्रोच्चारण के साथ लोकजात के लिए तैयार डोली में तंत्रमंत्र व गायत्री शक्तियां समाहित की गई। इसके उपरांत शुभ मुहूर्त में 7 बजे लोकजात ने राकेश्वरी मंदिर से मनणी बुग्याल के लिए प्रस्थान किया। आराध्य देवी-देवताओं के जयकारों के साथ यात्रा रांसी से आगे बढ़ते हुए सुबह दस बजे सनियारा बुग्याल पहुंची, जहां पूजा-अर्चना की गई। इसके उपरांत लोकजात खनेरा वड्यार, पटुड़ी धार, दोफनू होते हुए शाम चार बजे पहले पड़ाव थौली पहुंची। यात्रा में स्थानीय बलवीर सिंह, अनिल जिरवाण, अमित सिंह, धीरेंद्र, कमल सिंह सहित दस से अधिक श्रद्धालु शामिल हैं। रांसी गांव निवासी रवींद्र भट्ट व ग्राम प्रधान रूप सिंह नेगी ने बताया कि प्रतिवर्ष सावन माह में आयोजित मनणी माई लोकजात में श्रद्धालु धार्मिक आस्था के साथ प्रकृति के अनुपम सौंदर्य का दीदार भी करते हैं। बताया कि 64 किमी पैदल इस यात्रा में शनिवार 27 जुलाई को लोकजात थौली से विनायक धार, द्वारी धार, शिला समुद्र होते हुए मनणी नदी को पार कर रात्रि प्रवास के लिए मनणी बुग्याल पहुंचेगी। जहां 28 जुलाई को श्रद्धालुओं द्वारा ब्रह्म बेला में मां मनणी की विशेष पूजा-अर्चना की जाएगी। आराध्य को श्रृंगार सामग्री के साथ मौसमी फल व सब्जी भेंट की जाएगी। इसके बाद लोकजात वापसी करते हुए रात्रि प्रवास के लिए थौली पहुंचेगी। 29 को मां मनणी की डोली के साथ सनियारा बुग्याल में विशेष पूजा होगी और फिर 30 जुलाई को रांसी गांव पहुंचने पर राकेश्वरी मंदिर में पांच दिवसीय लोकजात का समापन होगा।