8 दिन पूर्व भगवती से व्हट्सएप पर कुछ देर के लिए बातचीत हुई थी। कॉल से बात करने दोनों ने कई बार प्रयास किया। लेकिन कनेक्टिविटी नहीं होने से बात नहीं हो पाई।
आज दोपहर को उसके हेलीकॉप्टर हादसे में मरने की खबर पर यकीन नहीं हो रहा है। तीन वर्ष पूर्व आखिरी बार उससे भेंट हुई थी, तब वह उसी तरह गले मिला था, जब स्कूल के दौरान मिलता था।
ये शब्द कोटमा गांव के अनिल भट्ट के हैं, जो भगवती प्रसाद भट्ट के स्कूली जीवन के मित्र होने के साथ गांव में परिवार के भाई भी है। गांव घटना के बाद से मातम पसरा हुआ है।
कोटमा गांव निवासी स्व. बच्ची राम भट्ट और स्व. कविता देवी की चार संतानों में सबसे छोटे भगवती प्रसाद भट्ट ने प्राथमिक से हाईस्कूल तक की पढ़ाई गांव के प्राइमरी व इंटर कॉलेज में की। वर्ष 1995 में जीआईसी गुप्तकाशी से इंटरमीडिएट की पढ़ाई के बाद बीएससी देहरादून से की।
वर्ष 2004-05 में सीडीएस में उत्तीर्ण होने के बाद वह बीएसएफ में असिसटेंट कमांडेट के पद पर तैनात हुए। वर्ष 2006 में उनकी देहरादून से शादी हुई। 2009 में जहां उन्हें पुत्र रत्न की प्राप्ति हुई।
वहीं वे ऑन डेप्यूटेशन फ्लाइंग ऑफिसर बनाए गए। इन दिनों परिवार दिल्ली में रह रहा था। डेढ़ माह पूर्व वे दूसरे बेटे के पिता बने।
गांव के देवी प्रसाद भट्ट बताते हैं वर्ष 2012 में अपनी माता जी के वार्षिक श्राद्ध के समय भगवती भाई जी तीन दिन के लिए आखिरी बार गांव आए थे। प्रत्येक घर से मिलजुल कर वापस गए थे।
महेश चंद्र सती व पुरूषोत्तम भट्ट बताते हैं कि भगवती बचपन से ही होनहार था। पढ़ाई से लेकर घर के कामकाज व खेलकूद में भी वह अव्वल था। मिलनसार होने के साथ वह मददगार व्यवहार का था, जिससे वह सबसे का प्रिय था। उनके बडे़ भाई जगदीश प्रसाद का कुछ समय पूर्व निधन हो गया था। दूसरे भाई नोएडा और तीसरे भाई देहरादून में रहते हैं।