रुद्रप्रयाग। छह सौ वर्षों से अधिक समय से बेंजी गांव संस्कृत का संरक्षण करता आ रहा है। यहां संस्कृत भाषा के कई जानकार हुए हैं, जिनकी हस्तलिखित पुस्तकें आज भी गांव में सुरक्षित हैं। अब, बेंजी गांव संस्कृत भाषा के संरक्षण और प्रचार-प्रसार की नई अलख जगाने को तैयार है।
उत्तराखंड संस्कृत अकादमी द्वारा इस गांव को संस्कृत ग्राम घोषित किया है। अब गांव में शिक्षक की तैनाती की तैयारी की जा रही है। संस्कृत अकादमी रुद्रप्रयाग के सहायक निदेशक मंशाराम मैंदुली ने बताया कि अब गांव में संस्कृत शिक्षक की तैनाती के लिए आवेदन मांगे गए हैं।
सभी औपचारिकताएं पूरी कर यहां जल्द कार्य शुरू किया जाएगा। संस्कृत ग्राम में संस्कृत कक्षाओं के संचालन के लिए जगह भी चिह्नित की गई है।बता दें कि बेंजी गांव जनपद का इकलौता गांव है, जिसका अपना संग्रहालय है। इस संग्रहालय में 400 से 500 वर्ष पुरानी हस्तलिखित पांडुलिप, वर्तन, अन्य प्राचीन धरोहरें मौजूद हैं। साथ ही यहां शंकराचार्य माधवाश्रम जी महाराज के वस्त्र भी रखे गए हैं। इस संग्रहालय में हस्तलिखित 450 वर्ष पुराने श्रीमद्भागव पुराण की पांडुलिपि भी है। संवाद