वर्ष 2006 में खुले डायट को वर्ष 2014 में पूर्ण मान्यता मिल चुकी है। शासन ने पद तो सृजित किए, लेकिन उन पर तैनाती नहीं हो पाई है। संस्थान में वरिष्ठ प्रवक्ता के छह पद रिक्त हैं। प्रवक्ताओं के भी 17 पदों के सापेक्ष सिर्फ 7 ही कार्यरत हैं। कार्यानुभव शिक्षक, पुस्तकालयाध्यक्ष, तकनीकी सहायक के पदों पर तैनाती नहीं हो पाई है। लेखाकार, आशुलिपिक व प्रयोगशाला सहायक के पद भी खाली हैं।
जबकि संस्थान में पूरे शिक्षण सत्र में बेसिक से लेकर माध्यमिक स्तर के शिक्षक-शिक्षिकाओं का 7 से 10 दिवसीय प्रशिक्षण होते रहते हैं। ऐसे में यहां तैनात अधिकारियों व प्रवक्ता को खासी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। दूसरी तरफ शासन की ओर से कक्षा 4, 7 और 9 के लिए गढ़वाली में पाठ्यक्रम तैयार करने का जिम्मा भी इस डायट को सौंपा गया है।
डायट में वरिष्ठ प्रवक्ता व प्रवक्ता के कई पद रिक्त होने से प्रशिक्षण कार्यक्रमों के संचालन में दिक्कतें हो रही हैं। पत्राचार के माध्यम से निदेशालय व शासन को लगातार अवगत कराने पर भी इस संबंध में कोई सकारात्मक जवाब नहीं मिला है। - सुधीर सिंह असवाल प्राचार्य डायट, रतूड़ा (रुद्रप्रयाग)