अगस्त्यमुनि ब्लाक मुख्यालय से 23 किमी की दूर बेंजी गांव के ग्रामीणों को पर्याप्त पानी नहीं मिल पा रहा है। पेयजल लाइन क्षतिग्रस्त होने पर भी विभाग मरम्मत नहीं कर रहा है। ऐसे में अधिक परेशानी गांव में रह रहे अकेले बुजुर्गों को झेलनी पड़ रही हैं।
वयोवृद्ध जेपी बेंजवाल, भद्रमणी बेंजवाल, भारती देवी का कहना है कि कड़ाके की ठंड में भी उन्हें एक बर्तन पानी के लिए तड़के दूरस्थ स्रोत की दौड़ लगानी पड़ रही है। सरकार ने शहीद आदर्श गांव तो बनाया, लेकिन सड़क, स्कूल, पानी, अस्पताल की सुविधा देना भूल गई। सुविधाओं के अभाव में यह गांव खाली हो चुका है।
ग्राम प्रधान पार्वती देवी का कहना है कि पेयजल समस्या के बारे में विभाग को कई बार अवगत कराया जा चुका है। बीडीसी में भी मुद्दा कई बार उठाने के बाद भी विभागीय अधिकारियों के कान पर जूं तक नहीं रेंग रही है।
पलायन की मार झेल रहा बेंजी
रुद्रप्रयाग। ढाई दशक पहले बेंजी गांव में सवा दो सौ परिवार रहते थे। सुविधाओं के अभाव में लगातार पलायन से अब यहां सिर्फ 35 परिवार रह गए हैं। गांव में सरकारी सुविधा के नाम पर पुराना प्राथमिक विद्यालय है। जूनियर की पढ़ाई हो चाहे, बुखार की दवा या फिर चीनी-नमक, ग्रामीणों को अगस्त्यमुनि की दौड़ लगानी पड़ती है। गांव से पैदल रास्ते से अगस्त्यमुनि 6 किमी और सड़क मार्ग से 23 किमी दूर है।