अगस्त्यमुनि। मंदाकिनी शरदोत्सव के समापन पर केदारघाटी मंडाण ग्रुप की ओर से महिला चक्रव्यूह नाट्य मंचन ने दर्शकों को भावुक कर दिया। आचार्य कृष्णानंद नौटियाल के निर्देशन में मंचित इस नाटक में महिला कलाकारों ने महाभारत काल के प्रसंग अभिमन्यु वध को जीवंत कर दिया।
नाटक में श्रीकृष्ण, युधिष्ठिर, भीम, अर्जुन, नकुल, सहदेव और अभिमन्यु और कौरवों की भूमिकाओं को महिला कलाकारों ने बखूबी निभाया। मंचन के दौरान जब अभिमन्यु चक्रव्यूह में प्रवेश कर वीरता से युद्ध लड़ा और अंततः कौरवों के छल से वीरगति प्राप्त की तो सभागार में बैठे लोग भावुक हो गए। सुभद्रा का करुण विलाप और द्रौपदी की ओर से अभिमन्यु को गोद में लेने का दृश्य देखकर कई दर्शकों की आंखें नम हो गईं। वहीं अर्जुन की ओर से जयद्रथ वध की प्रतिज्ञा वाले प्रसंग ने दर्शकों में जोश भर दिया। आचार्य नौटियाल के निर्देशन में यह मंचन हुआ। संवाद
जिले में पहली बार महिलाओं ने किया चक्रव्यूह मंचन
विनोद नौटियाल
उखीमठ। रुद्रप्रयाग जिले में पहली बार महिलाओं ने चक्रव्यूह का मंचन किया। इससे पहले पोखरी, उत्तरकाशी व देहरादून में महिलाएं चक्रव्यूह का मंचन कर चुकी हैं।
अगस्त्यमुनि में आयोजित मंदाकिनी शरदोत्सव महोत्सव में केदारघाटी मंडाण सांस्कृतिक ग्रुप से जुड़ी महिलाओं ने पहली बार गढ़वाली चक्रव्यूह का मंचन किया। केदारघाटी के 200 से अधिक गांवों में चक्रव्यूह, पांडव लीलाओं आदि का मंचन होता है। 25 फरवरी 1995 को कंडारा गांव के पुरुष पात्रों की ओर से पहला गढ़वाली चक्रव्यूह मंचन किया गया था। केदारघाटी में अब तक पुरुष ही चक्रव्यूह मंचन में अभिनय करते रहे हैं। केदारघाटी मंडाण ग्रुप के निर्देशक एवं गढ़वाली चक्रव्यूह के लेखक आचार्य कृष्णानंद नौटियाल व संरक्षक/ प्रबंधक ठाकुर नरेंद्र सिंह रौथाण ने बताया कि गढ़वाली चक्रव्यूह के अब तक 2 हजार से अधिक मंचन किए जा चुके हैं। वहीं अब केदारघाटी मंडाण सांस्कृतिक ग्रुप से जुड़ी महिलाओं ने इसका मंचन शुरू किया है। जिले में ऐसा पहली बार हुआ है। महिला चक्रव्यूह का मंचन अभी हाल ही में देहरादून में हुए आयोजित राष्ट्रीय कार्यक्रम निनाद में किया जा चुका है। संवाद