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हेलीकाप्टर से लटकाकर पहुंचाई निर्माण सामग्री

Tue, 17 Nov 2015 03:52 PM IST
अमर उजाला रुद्रप्रयाग।
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मंगलवार को केदारनाथ के पुनर्निर्माण में एक नया अध्याय जुड़ गया है। विश्व में पहली बार सिविल क्षेत्र में 11500 फीट की ऊंचाई पर हो रहे निर्माण के लिए पहली बार हेलीकाप्टर में नेट की मदद से लटकाकर निर्माण सामग्री पहुंचाई गई है।
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हेलीकाप्टर से पांच शट्ल में 20 कुंतल सामग्री धाम पहुंचाई गई है। अभी करीब तीन सौ टन से अधिक निर्माण सामग्री और पहुंचाई जानी है।
केदारनाथ में नेहरू पर्वतारोहण संस्थान पुनर्निर्माण में अत्याधुनिक तकनीक का इस्तेमाल कर रहा है। पुनर्निर्माण के लिए सामग्री धाम तक आसानी से पहुंचाने के लिए अब अंडर सलंग आपरेशन के तहत कारगो स्विंग का उपयोग हो रहा है।

सिविल में मध्य हिमालय क्षेत्र में (साढ़े 11 हजार फीट की ऊंचाई) निर्माण सामग्री पहुंचाने का यह पूरे विश्व में पहला मौका है। हेलीकाप्टर से एक चक्कर में अधिकतम पांच कुंतल सामग्री ले जाई जा रही है। अंडर सलंग कारगो के तहत हेलीकाप्टर पर एक मजबूत नेट बांध दिया जाता है। नेट में वजन और साइज के हिसाब से निर्माण सामग्री/वस्तुओं को रखा जाता है। हेलीकाप्टर के उड़ान भरने पर सामग्री से भरा यह नेट हवा में झूलने लगता है।
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पांच माह तक किया अध्ययन
देवभ्ूमि एविएशन के पायलट कैप्टन अनूपम कैथूरिया ने बताया कि हेलीकाप्टर से लटकाकर निर्माण सामग्री को केदारनाथ पहुंचाने के लिए पांच माह से अध्ययन हो रहा था। भौगोलिक परिस्थितियों के साथ मौसम और हवा की दिशा और गति के बारे में हेलीकाप्टर के पायलट व निम के विशेषज्ञों ने अध्ययन किया।

उसके बाद अंडर सलंग कारगो का निर्णय लिया गया। सिविल क्षेत्र में निर्माण स्थल पर 11500 फीट की ऊंचाई पर हेलीकाप्टर से नेट के सहारे लटकाकर निर्माण सामग्री ले जाने का विश्व का यह पहला मौका है। इससे पूर्व साउथ अमेरिका में 8 हजार फीट की ऊंचाई पर किया जा चुका है।

इधर, देवभूमि ऐविएशन के योगेंद्र राणा ने बताया कि अंडर सलंग कारगो में हेलीकाप्टर की गति के साथ हवा की दिशा का भी विशेष ध्यान रखना पड़ता है।

 
पहाड़ों में बड़ी निर्माण सामग्री ले जाने के लिए रास्ते या सड़क मार्ग से काफी दिक्कतें हैं। ऐसे में हेलीकाप्टर से लटकाकर सामान ले जाने की विधि अपनाई गई।  इस विधि से जहां सामान जल्द धाम पहुंचेगा, वहीं पुनर्निर्माण में निरंतरता बने रहने के साथ समय पर भी पूरे होंगे।
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- कर्नल अजय कोठियाल, प्राचार्य निम
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