बीजेपी ने रुद्रप्रयाग विधानसभा में इस बार नई पटकथा लिखी है। पार्टी ने न सिर्फ एक तरफा जीत दर्ज की बल्कि अपने खोए हुए वोट बैंक में भी दस प्रतिशत से अधिक की वृद्धि की है।
विधानसभा सीट रुद्रप्रयाग में भारतीय जनता पार्टी ने जीत का नया रिकार्ड बनाया है। बीते पांच विस चुनाव हार चुके पार्टी प्रत्याशी भरत सिंह चौधरी ने जो विश्वास व हिम्मत दिखाई, यह उसी का परिणाम है कि उन्होंने कुल वोटिंग का 51 फीसदी से अधिक मत प्राप्त कर नई उपलब्धि हासिल की है। साथ ही पार्टी के खोए वोट बैंक में दस प्रतिशत से अधिक की वृद्धि कर वापसी भी कराई है। रुद्रप्रयाग विस को भाजपा का गढ़ माना जाता रहा है। वर्ष 2002 और 2007 में पार्टी से मातबर सिंह कंडारी चुनाव जीतकर विधानसभा पहुंचने के साथ केबिनेट मंत्री भी रहे।
भले ही वे 2012 में अपने साडू भाई व कांग्रेस प्रत्याशी डा. हरक सिंह रावत से चुनाव हार गए थे। पहली बार वह 5 हजार और दूसरी बार 7020 वोट से जीते थे, लेकिन चौधरी ने जिस तरह से इस चुनाव में जीत हासिल की है वह कई मायनों में अलग है। करीब चार वर्ष पूर्व कांग्रेस छोड़कर भाजपा में शामिल हुए चौधरी ने हमेशा ही स्थानीय प्रतिनिधित्व की पैरवी की।
संगठन के निर्देशों से इतर रुद्रप्रयाग तहसील में चार दिवसीय आंदोलन हो चाहे मंचों पर बाहरी प्रतिनिधियों का विरोध, वे हमेशा से तल्ख रहे। उनका साफ कहना था कि रुद्रप्रयाग विस को बाहरी लोग संचालित कर रहे हैं, जिस कारण विकास ठप है। इस दौरान जिले की राजनीति भी काफी गर्म रही, लेकिन चौधरी पर पार्टी ने विश्वास जताया, जिस पर वे खरे भी उतर चुके हैं। भाजपा को मिली यह जीत, चौधरी के साथ पार्टी के लिए भी संजीवनी है।