उत्तराखंड संस्कृत अकादमी की कालिदास सप्ताह महोत्सव के तहत ‘महाकवि कालिदास्य जन्मभू’ विषय पर संगोष्ठी का आयोजन किया गया। इस मौके पर वक्ताओं ने महाकवि की साहित्य साधना व सृजन पर चर्चा करते हुए नई पीढ़ी को संस्कृत भाषा के प्रति जागरूक बनाने पर जोर दिया।
ऑनलाइन आयोजित संगोष्ठी का शुभारंभ अंकित मनोड़ी ने मंगलाचरण के साथ किया। इस अवसर पर मुख्य वक्ता एवं राष्ट्रपति पुरस्कार से सम्मानित रुद्रप्रयाग जिले के कविल्ठा गांव निवासी आचार्य सुरेशानंद गौड़ ने महाकवि कालीदास के संस्कृत साहित्य पर चर्चा की। कहा, कि कालीमठ घाटी का कविल्ठा गांव, महाकवि की जन्मभूमि व कर्मभूमि है, जिसके प्रमाण उनके साहित्य सृजन में मिलते हैं। कहा कि महाकवि द्वारा रचित अभिज्ञान शाकुंतलम, रघुवंश, मेघदूत, कुमारसंभव में क्षेत्र और वहां के प्राकृतिक सौंदर्य का वर्णन किया गया है। इस मौके पर सहायक वक्ता सूर्य हेब्बार , मुख्य अतिथि डा. नरेंद्र पांडेय, पीजी कॉलेज अगस्त्यमुनि के मधुसूदन सती, देवेंद्र प्रसाद ने संस्कृत वाचन व लेखन से नई पीढ़ी को जोड़ने के लिए स्कूल व कॉलेज स्तर पर समय-समय पर संगोष्ठी व प्रतियोगिताओं के आयोजन पर जोर दिया। ऑनलाइन संगोष्ठी में राकेश शर्मा, गिरीश तिवारी, रोशन गौड़, डा. कमलेश शक्टा, डॉ शशिबाला पंवार, डा. निधि छाबड़ा, डा. आबिदा, डा. चंद्रकला नेगी ने भी प्रतिभाग किया।