रुद्रपुर। महिला सशक्तीकरण एवं बाल विकास विभाग में गलत तथ्य देकर नौकरी हासिल करने वाली आंगनबाड़ी सहायिका की सेवा समाप्त कर दी गई है। जांच के दौरान आंगनबाड़ी सहायिका ने लिखित में गलती स्वीकार की थी। हालांकि सहायिका से रिकवरी की कार्रवाई नहीं की जाएगी।
दरअसल मार्च 2013 में खेड़ा आंगनबाड़ी केंद्र में सहायिका के पद पर नीलम की नियुक्ति की गई थी। नीलम ने नियुक्ति के समय दिए शपथपत्र में खुद को अविवाहित दर्शाया था लेकिन उसकी शादी फरवरी 2012 में खटीमा निवासी पंचानंद से हो चुकी थी। वर्ष 2012 में नीलम ने ससुरालियों के खिलाफ दहेज, परिवारवाद और घरेलू हिंसा का केस दर्ज कराया था, जो कोर्ट में विचाराधीन है।
मुकदमेबाजी हुई तो पति पंचानंद ने नीलम के खिलाफ झूठे तथ्य देकर नियुक्ति पाने की शिकायत डीएम के साथ ही बाल विकास परियोजना अधिकारी से की थी। नियमानुसार सहायिका पद पर उसी अभ्यर्थी का चयन होता है जो उसी केंद्र या वार्ड की निवासी होती है। हालांकि नीलम के मामले में गलत शपथपत्र देने को आधार बनाया गया।
मामला डीएम के पास पहुंचा तो उन्होंने डीपीओ को कार्रवाई करने के आदेश दिए थे। डीपीओ ने बाल विकास परियोजना अधिकारी शहरी क्षेत्र को कार्यवाही के निर्देश दिए थे। सीडीपीओ रमा रावत ने बताया कि जांच में पाया गया कि नियुक्ति के समय नीलम शादीशुदा थी और उसने शपथ पत्र में खुद को अविवाहित बताया था।
जांच में नीलम ने भी लिखित रूप में अपनी गलती स्वीकार की है। इसके बाद नीलम की सेवा 22 अगस्त को समाप्त कर दी गई हैं। कोर्ट के आदेश हैं कि सेवा समाप्त होने के बाद रिकवरी नहीं की जा सकती है, लिहाजा नीलम से रिकवरी नहीं की जाएगी। पंजीकृत डाक से सेवा समाप्त होने का पत्र नीलम को भेज दिया गया है।