उद्यान विभाग की ओर से बनाए गए तीन सचल केंद्रों में एक महीने में सिर्फ 72 कुंतल माल्टा की खरीद हो पाई है। अगस्त्यमुनि ब्लाक से विभाग एक भी माल्टा नहीं खरीद पाया। खरीदा गया माल्टा भी सी ग्रेड का है। यह स्थिति तब है, जबकि जिले में इस वर्ष 651 मीट्रिक टन उत्पादन हुआ है।
सरकार की ओर से माल्टा-संतरा और नींबू का समर्थन मूल्य घोषित होने के बाद भी काश्तकारों का माल्टा बाजार तक नहीं पहुंच पा रहा है। उद्यान विभाग भी एक माह में मयाली और गुप्तकाशी सचल केंद्र के माध्यम से 35 काश्तकारों से 49 हजार रुपये का ही माल्टा खरीद पाया है। जबकि जिले में 651 मीट्रिक टन माल्टा उत्पादन हुआ है। काश्तकारों का कहना है कि विभाग माल्टा को सी ग्रेड का मानकर खरीद रहा है, जिसका उन्हें कोई लाभ नहीं मिल पा रहा है। गांव से केंद्र तक पहुंचाने तक ही उनका भाड़ा प्राप्त मूल्य से अधिक पहुंच रहा है। इधर, जिला उद्यान अधिकारी जीएल मखनवाल का कहना है कि प्रयास किए जा रहे हैं कि खोले गए सचल केंद्रों के माध्यम से अधिकाधिक काश्तकारों तक पहुंचा जाए। हालांकि दूरस्थ क्षेत्र होने से खरीद कम हो रही है।
बंदरों ने बर्बाद किया माल्टा
रुद्रप्रयाग। जिले के अंतिम गांव गौंडार में 40 कुंतल से अधिक माल्टा का उत्पादन हुआ। लकिन एक भी माल्टा बाजार तक नहीं पहुंचा। ग्रामीणों द्वारा 12 से 15 प्रतिशत उपयोग किया गया। शेष पेड़ों पर बंदरों द्वारा नष्ट किया गया। गांव के कमल सिंह पंवार का कहना है कि सड़क से दूर होने के कारण उनके उत्पाद बाजार तक नहीं पहुंच पाते हैं। गांव में रामदाना, आलू और राजमा की अच्छी उपज होती है।