अगस्त्यमुनि/रुद्रप्रयाग। बुधवार को गंगतल-सिल्ली के बीच घायल स्थिति में एक गुलदार मंदाकिनी नदी में बह गया। प्रत्यक्षदर्शियाें का कहना है कि गुलदार वन विभाग की लापरवाही से बहा। समय पर सूचना देने के बावजूद विभागीय कर्मी छह घंटे बाद ट्रंक्यूलाइज गन के साथ मौके पर पहुंचे। उसपर भी स्थिति यह थी कि वह गन किसी कर्मी को चलानी नहीं आती थी।
दीपावली की सुबह केदारनाथ हाईवे पर गंगतल महादेव मंदिर से करीब आधा किलोमीटर आगे सड़क से 10 मीटर नीचे नदी की तरफ एक गुलदार के गिरे होने की सूचना मिली। ग्रामीणों ने इसकी जानकारी वन विभाग को दी। मौके पर भीड़ लगने पर अगस्त्यमुनि पुलिस चौकी की टीम और वन विभाग के वन दारोगा लक्ष्मण सिंह राणा भी पहुंच गए।
गुलदार के सिर और पिछले पांवों पर गंभीर चोट दिखाई दे रही थी। जिस वजह से वह सिर्फ अगले पैरों से चल पा रहा था। सिर की चोट पर मक्खियां भिनभिना रहीं थीं। गुलदार की उम्र लगभग चार वर्ष लग रही थी। प्रत्यक्षदर्शी पूर्व कनिष्ठ उप प्रमुख रमेश बेंजवाल ने बताया कि सुबह सात बजे सूचना देने के बाद वन विभाग के कर्मी खाली हाथ मौके पर आए। दोपहर करीब एक बजे ट्रंक्यूलाइज गन (बेहोशी की दवा वाली बंदूक) मंगवाई गई, लेकिन यह किसी को चलानी नहीं आती थी। यह बंदूक एक पुलिस कर्मी को दी गई। पुलिस कर्मी के नजदीक जाने पर गुलदार डरने लगा। इसी हड़बड़ाहट मेें वह नदी में जा गिरा। बेंजवाल ने आरोप लगाया कि वन विभाग की लापरवाही से गुलदार से नदी में गिरा।
इधर वन दारोगा राणा ने बताया कि जानवर को बेहोश करने के लिए लगभग सात मीटर दूर से बंदूक चलानी पड़ती है। पुलिसकर्मी को वाहन के सहारे बांधकर नीचे उतारा गया। गुलदार ने पुलिसकर्मी पर हमला करने की कोशिश की। जिसके कारण वह नदी में गिर गया। उन्होंने बताया कि आपसी संघर्ष या जंगली सुअर के साथ लड़ाई में गुलदार घायल हो सकता है। नदी किनारे गुलदार की तलाश की गई, लेकिन वह नहीं मिला।
सिल्ली मेें गुलदार की दहाड़
रुद्रप्रयाग। बृहस्पतिवार रात सिल्ली क्षेत्र में गुलदार की दहाडे़ें सुनाई दीं। ग्रामीणों का कहना है कि पहले यहां दो गुलदार देखे गए थे। हो सकता है कि नदी में बहे गुलदार का साथी क्षेत्र मेें उसकी तलाश कर रहा हो।