रुद्रप्रयाग। केदारनाथ हाईवे पर यात्रा के लिए खलनायक बने मुंडकटिया पैच से छुटकारा पाने के लिए सरकार एलीवेटेड रोड (जमीन से ऊपर सड़क) बनाने की कवायद कर रही है। योजना के अनुसार काम होने पर यात्रियों को सोनप्रयाग से केदारनाथ के लिए अतिरिक्त पांच किलोमीटर पैदल नहीं चलना पडे़गा। पिछले साल जून माह में आए केदारनाथ जलप्रलय में केदारनाथ हाईवे सोनप्रयाग बाजार से आगे कई स्थानों पर पूरी तरह ध्वस्त हो गया था। आपदा के बाद नवंबर में बीआरओ ने बाजार से कुछ आगे वैली ब्रिज का निर्माण कर गौरीकुंड से करीब एक किमी पहले तक वाहनों का आवागमन चालू कराया।
पुरानी सड़क के ध्वस्त होने से बीआरओ ने करीब एक किमी कच्ची सड़क का निर्माण नदी के समानांतर किया था। मुंडकटिया के समीप यह सड़क सर्पीले बैंड से पुरानी सड़क के साथ जुड़ती है। लेकिन इस वर्ष जुलाई माह में आई बारिश से यह मार्ग तहस-नहस हो गया।
मुख्य सचिव सुभाष कुमार से लेकर अन्य अधिकारियों ने यहां समय-समय पर निरीक्षण कर बीआरओ को नए एलाइनमेंट पर सड़क निर्माण के निर्देश दिए थे। इस पैच की दिक्कत यह है कि करीब 300 मीटर ऊपर से भूस्खलन हो रहा है। हिल कटिंग से भूस्खलन बढ़ने की आशंका है। नीचे की ओर मंदाकिनी नदी होने से निर्माण संभव नहीं है। सोनप्रयाग से आगे गौरीकुंड तक फ्लाई ओवर की तर्ज पर एलीवेटेड रोड बनाने का प्लान है, ताकि नदी और पहाड़ से दूर सुरक्षित सड़क का निर्माण हो सके।
कोट-
सोनप्रयाग से गौरीकुंड तक एलीवेटेड रोड बनाने का विचार है। अगले दो वर्षों में यात्रियों को बेहतर सड़क मिलेगी। - हरीश रावत, मुख्यमंत्री उत्तराखंड सरकार(अगस्त्यमुनि में आयोजित कार्यक्रम में)
यह है एलीवेटेड रोड
एलीवेटेड रोड या फ्लाई ओवर जमीन से ऊपर बनाई जाती है। मैदानी क्षेत्रों में व्यस्त चौराहों या भीड़-भाड़ वाले इलाकों में एलीवेटेड रोड (फ्लाईओवर)बनाई जाती है। जबकि पहाड़ में ऐसे स्थानों पर एलीवेटेड रोड का निर्माण किया जा सकता है, जहां नदी, नाले या भूस्खलन प्रभावित क्षेत्र हैं। सड़क को पिल्लर के सहारे जमीन से ऊपर बनाया जाता है। इसमें नदी के ऊपर निर्माण के समान तकनीकी का प्रयोग होता है।