रुद्रप्रयाग। जखोली तहसील में गलत तरीके से भवन क्षतिग्रस्त दिखाकर मुआवजा हड़पने वाले लोगों के साथ ही राजस्व कर्मी भी नप सकते हैं। डीएम के निर्देश पर एडीएम और डीडीओ की टीम मुआवजे में फर्जीवाडे़ की जांच करेगी।
2014 की आपदा के दौरान सरकारी रिपोर्ट के मुताबिक जखोली तहसील में 73 भवन पूर्ण : और 101 भवन क्षतिग्रस्त हुए थे। पूर्ण क्षतिग्रस्त होने पर प्रभावित भवन स्वामियों को दो लाख और गंभीर क्षति पर एक लाख रुपये गृह अनुदान दिया गया। राजस्व कर्मियों की ओर से किए गए सर्वेक्षण में शुरू से ही विवाद होेता रहा। कुछ लोेगों ने सरकारी कर्मचारियों के साथ मिलकर आपदा राहत राशि को ठिकाने लगा दिया। अमर उजाला ने इस मामले को प्रमुखता से उठाया। जहां ज्यादा नुकसान हुआ या जिस व्यक्ति का ज्यादा नुकसान हुआ, उसके बजाय अन्य को अधिक लाभ पहुंचाया गया। इसमें तहसील कर्मचारियों और कुछ स्थानीय नेताओं पर सवाल उठते रहे हैं। अनावासीय और वर्षों पहले से टूटे हुए मकानों को आपदा में क्षतिग्रस्त दिखाया गया। जबकि राहत राशि सिर्फ 2013 की आपदा प्रभावितों को मिलनी चाहिए थी।
पूर्व में संयुक्त जनसंघर्ष मोर्चा की मांग पर एसडीएम जखोली ने नायब तहसीलदार को जांच सौंपी थी। लेकिन मोर्चा इससे संतुष्ट नहीं था। आंदोलन को देखते हुए डीएम ने जिलास्तरीय अधिकारियों को जांच अधिकारी नियुक्त कर दिया।
कोट-
ईमानदारी से निष्पक्ष जांच होने पर कई चेहरे बेनकाब होंगे। राजस्व कर्मियों ने कुछ लोगों के साथ मिल कर सरकारी खजाने को चपत लगाई है।- दीपक भट्ट, संयोजक संयुक्त जनसंघर्ष मोर्चा
एडीएम और डीडीओ मामले की जांच करेंगे। जांच टीम दस्तावेजों को चेक करने के साथ ही भौतिक सत्यापन करेगी। दोषियों के विरुद्ध कार्रवाई की जाएगी।- डा. राघव लंगर, डीएम रुद्रप्रयाग