रुद्रप्रयाग/गुप्तकाशी। गौरीकुंड-केदारनाथ पैदल मार्ग पर आवश्यक वस्तुओं की आपूर्ति घोडे़ खच्चरों से हो सकेगी। इस मामले में बढ़ता दबाव रंग लाया है। हालांकि आम श्रद्घालु अब भी केदारनाथ धाम के पैदल मार्ग पर घोडे़-खच्चरों में बैठकर नहीं जा पाएगा। व्यापारियों और मजदूरों के विरोध प्रदर्शन के बाद एसडीएम ऊखीमठ राकेश तिवारी ने इस मामले में उनसे बात की। यह फैसला किया गया है कि जरूरी सामान घोडे़-खच्चरों में ले जाया जा सकेगा। इस संशोधन की आड़ में यात्रियों को भी ढोया गया।
नैनीताल हाईकोर्ट द्वारा जिला पंचायत को सफाई व्यवस्था के लिए कडे़ कदम उठाने के आदेश के बाद जिला पंचायत ने पैदल 14 किमी मार्ग पर घोड़े-खच्चरों की आवाजाही पर अस्थायी पाबंदी लगा दी थी। मगर इसका विरोध शुरू हो गया था। जिला पंचायत के इस निर्णय से तीर्थयात्रियों के केदारनाथ जाने के लिए गौरीकुंड से पैदल यात्रा या डंडी-कंडी ही सहारा रह गया है। पाबंदी से खफा व्यापारियों और मजदूरों ने बृहस्पतिवार को गौरीकुंड में प्रदर्शन किया था। एसडीएम ऊखीमठ राकेश तिवारी के साथ चली वार्ता के बाद संशोधन कर दिया गया।
घोडे़-खच्चरों पर रोक का मामला गरमाया
विधायक ने जिला पंचायत को लिया निशाने पर, अध्यक्ष का पलटवार
अमर उजाला ब्यूरो
रुद्रप्रयाग। जरूरी सामान के संबंध में घोडे़ खच्चर की केदारनाथ रूट पर आवाजाही को मंजूरी भले ही मिल गई, मगर यह मामला गरमाया हुआ है। शुक्रवार को इस मामले में केदारनाथ विधायक शैला रानी रावत सामने आ गई। उन्होंने जिला पंचायत को निशाने पर ले लिया। उन्होंने आरोप लगाया कि जिला पंचायत समस्या का हल निकालने के बजाय उससे दूर भाग रहा है। उन्होंने यहां तक कह डाला कि यदि जिला पंचायत से व्यवस्था नहीं हो पा रही है, तो इसे दूसरी प्रशासनिक व्यवस्था के हैंडओवर कर देना चाहिए। सफाई व्यवस्था में श्री बदरीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति को भी योगदान देना चाहिए। दूसरी तरफ, जिला पंचायत अध्यक्ष चंडी प्रसाद भट्ट ने इस मामले में विधायक पर पलटवार किया है। उन्होंने जिला पंचायत की मजबूरी को सामने रखते हुए विधायक को इस मामले में राजनीति न करने की नसीहत दी है।
रोक के आदेश के बाद केदारनाथ के पैदल मार्ग पर घोडे़ खच्चर दिखाई नहीं दे रहे हैं। इस मामले में विरोध प्रदर्शन भी होने लगे हैं। राजनीतिक पार्टियां भी मुखर होकर सामने आने लगी है। एक दिन पहले माकपा ने इस मामले में नाराजगी जताई थी। अब कांग्रेस की क्षेत्रीय विधायक शैलारानी रावत हमलावर हैं। उन्होंने कहा कि गौरीकुंड-केदारनाथ 14 किमी पैदल मार्ग पर जिला पंचायत को सफाई की पुख्ता व्यवस्था करनी चाहिए, ना कि घोड़े खच्चरों पर प्रतिबंध लगाना चाहिए। विधायक ने कहा कि उन्होंने स्वयं निरीक्षण कर पैदल मार्ग देखा है, सफाई की स्थिति बेहद खराब है। केदानाथ यात्रा व्यवस्था भी वैष्णो देवी यात्रा पैट्रर्न पर होनी चाहिए।
कोट---फोटो सहित
‘मैं स्वयं जिला पंचायत अध्यक्ष रह चुकी हैं। मेरे कार्यकाल में कभी ऐसे अव्यवहारिक निर्णय नहीं लिए गए। सफाई की पुख्ता व्यवस्था पर सोचा जाना चाहिए, न कि घोडे़ खच्चरों का संचालन पर प्रतिबंध लगाया जाना। यह गलत निर्णय है और इसे बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। मजदूरों के हित की लड़ाई लड़ी जाएगी। उनकी रोटी-रोटी पर संकट नहीं आने दिया जाएगा। जिला पंचायत द्वारा मार्ग पर पर्याप्त सफाई कर्मियों की नियुक्ति नहीं की गई है। उनको पर्याप्त वेतन नहीं मिलता है।’
शैलारानी रावत, विधायक केदारनाथ।
‘हमने अपनी ओर से कुछ नहीं किया है। कोर्ट के आदेशों का अनुपालन किया जा रहा है। कोर्ट ने ऐसा शपथ पत्र देने को कहा था कि मनुष्य की आंख से घोडे़ खच्चरों की लीद नहीं दिखाई देनी चाहिए। ऐसा न होने पर कोर्ट ने घोडे़-खच्चरों का संचालन रोकने के आदेश दिए हैं। शनिवार को इस सबंध में कोर्ट में एएमए ने पेश होना है। अग्रिम कार्रवाई अदालत के आदेश पर की जाएगी। विधायक गलत आरोप लगा रही है। यह मसला राजनीति करने का कतई नहीं है।’
चंडी प्रसाद भट्ट, अध्यक्ष जिला पंचायत रुद्रप्रयाग