रुद्रप्रयाग। रुद्रप्रयाग और बच्छणस्यूं पट्टी में वायरल फीवर से पीड़ित मरीजों को सरकारी अस्पताल से राहत नहीं मिल पा रही है। राजकीय एलोपैथिक अस्पताल खेड़ाखाल में डॉक्टर नहीं होने की वजह से मरीजों को रुद्रप्रयाग, श्रीनगर जाना पड़ रहा है।
रुद्रप्रयाग जिले के नवासू, खेड़ाखाल, मोल्ठा, खिंगसारी, डांडरा, मुसोली, ढींगरी, बंगोली, गहड़खाल और नोखू सहित पौड़ी जिले के सीमावर्ती गांवों में लोग खांसी-जुखाम, बदन, गला दर्द और बुखार से पीड़ित हैं। समस्या यह है कि इन गांवों के केंद्र में स्थित खेड़ाखाल अस्पताल में लगभग दो साल से डॉक्टर नहीं है। अस्पताल को फार्मेसिस्ट चला रहा है। डॉक्टर नहीं होने की वजह से क्षेत्रवासियों को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। वायरल फीवर के शुरू में तो लोगों ने बाजार जाने वाले लोगों से एंटीबायोटिक मंगाकर उपचार की कोशिश की, लेकिन मर्ज बढ़ने पर मरीजों को 29 किमी दूर श्रीनगर और 28 किमी दूर रुद्रप्रयाग ले जाना पड़ा।
पूर्व प्रधान सुरेंद्र रौथाण, नवल किशोर, विजय बहुगुणा, सुमेर रौथाण का कहना है कि सामान्य बुखार में भी लोगों को अस्पताल से लाभ नहीं मिल पा रहा है। मौसम बदलने पर वायरल फीवर का प्रकोप बढ़ता जा रहा है।
इधर, सीएमओ डा. केडी शर्मा ने बताया कि फार्मेसिस्ट और एएनएम को वायरल फीवर से पीड़ित लोगों को दवाई वितरित करने के लिए कहा गया है। डॉक्टरों की नियुक्ति का मामला शासन स्तर का है।