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केदारघाटी की लोक संस्कृति से होंगे रूबरू बाबा केदार के भक्त

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रुद्रप्रयाग। भगवान केदारनाथ के दर्शनों को देश-विदेश से आने वाले श्रद्धालुओं को इस बार केदारघाटी की लोक संस्कृति, रीति-रीवाज से भी रूबरू होने का मौका मिलेगा। प्रशासन की ओर से इस बार यात्रा मार्ग से जुड़े सरकारी/गैर सरकारी गेस्ट हाउस, रेस्टोरेंट और होटल मालिकों को लोक संस्कृति से जुड़े कार्यक्रमों का मंचन कराने के आदेश दिए है। कार्यक्रम मे पांडव लीला व जीतू बगड्वाल नृत्य आदि शामिल है।
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29 अप्रैल से शुरू हो रही केदारनाथ यात्रा में रुद्रप्रयाग से गौरीकुंड और केदारनाथ तक रात्रि को ठहरने वाले श्रद्धालुओं को स्थानीय और देवभूमि उत्तराखंड की लोक परंपराओं के बारे में बताया जाएगा। इसके लिए ऋषिकेश-बदरीनाथ राजमार्ग पर खांकरा से घोलतीर के मध्य स्थित होटल व रेस्टोरेंट सहित केदारनाथ यात्रा मार्ग पर अगस्त्यमुनि, गुप्तकाशी, सोनप्रयाग और गौरीकुंड सहित केदारनाथ धाम में गढ़वाल मंडल विकास निगम के गेस्ट हाउस सहित निजी होटल व रेस्टोरेंट में पांडव नृत्य, जीतू बगड्वाल नृत्य, पारंपरिक नृत्य थड्या, झुमेलो चौफला सहित ढोल सागर, ढोल-दमाऊं व मशकबीन का मंचन का मंचन किया जाएगा। साथ ही पहाड़ की लोक संस्कृति से जुड़ी गाथाओं व गीतों को भी प्रस्तुत किया जाएगा। ये सभी कार्यक्रम प्रशासन व पर्यटन विभाग संस्कृति विभाग और अन्य सांस्कृतिक कला मंचों के साथ-साथ स्थानीय महिला व युवक मंगल दल, लोक कलाकारों की मदद से आयोजित करेगा। इन आयोजनों का मुख्य उद्देश्य केदारनाथ यात्रा को सुखद और सरल बनाना है। डीएम मंगेश घिल्डियाल ने बताया कि देश-विदेश तक पहाड़ व क्षेत्र की संस्कृति, रीति-रीवाज, भोजन, हस्तशिल्प पहुंचे, इस उद्देश्य से यात्रा मार्गों पर संचालित होटल, रेस्टोरेंट व गेस्ट हाउस में विशेष आयोजन किए जाएंगे। साथ ही पारंपरिक भोजन की व्यवस्था की जाएगी। इसके लिए होटल व्यवसायियों ने भी सहमति दे दी है।
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