अगस्त्यमुनि। मंदाकिनी शरदोत्सव में शुक्रवार को कवियों ने दर्शकों से खूब वाहवाही लूटी। कवियों ने आधुनिक फैशन, राजनीति, पलायन सहित विभिन्न मुद्दे उठाए अपनी कविताओं के जरिए, जिन्हें श्रोताओं ने सराहा।
पांच दिवसीय मंदाकिनी शरदोत्सव का चौथा दिन साहित्य संस्था कलश की ओर से आयोजित लोक कवि सम्मेलन और स्कूली छात्र-छात्राओं के रंगारंग कार्यक्रमों के नाम रहा। इस मौके पर आयोजन समिति की ओर से प्रतिभागियों को पुरस्कृत भी किया गया। क्रीड़ा मैदान में आयोजित सम्मेलन में संस्था के संस्थापक ओम प्रकाश सेमवाल ने जा भुला तू दूर परदेस मां, हुनर सीखी औ परेदेश मां कविता का पाठ किया। इसके उपरांत सुधीर बत्र्वाल ने पंडो नचौण मां, भगतु भैजी, स्वीली सुलौण में लाटि दादी, कविता के जरिए पलायन से खाली हुए गांवों की हकीकत बयां की। जबकि जगदंबा चमोला ने लाल होंठ खाब पर्स धर्यू हात मां, यौ सर्या जग्स सीं दिखेगी अधरात मा.. कविता से आधुनिक फैशन की स्थिति को बया किया। वहीं लोक कवि मुरली दीवान ने तेरा खूंन मा मिलीं च गढ़वालै विरासत.. से उत्तराखंड आंदोलन का चित्रण किया। तेजपाल निर्मोही ने अपनी कविता जौं पर भारी पीड़ा छै हमरी, तौंन रुप्यौं पर पीड़ रखै, राजनीतिक के वर्तमान स्वरूप को उकेरा। जबकि नितीश भंडारी ने जै ही देख्या सु देहरादून बटा लग्यूं और कुसुम भट्ट साबिब जना देहरादून से खाली होते पहाड़ पर चिंता जताई। युवा कवि अश्विनी गौड ने उत्तराखंड की लडै लडूयां सि हौर छां.. कविता से उत्तराखंड राज्य आंदोलन और वर्तमान स्थिति पर प्रकाश डाला। कवियत्री उपासना सेमवाल, मनमोहन भट्ट, ललित गुसांई, अजय नौटियाल, कविता भट्ट, भट्ट, दमयंती भट्ट और उमेद सिंह रौथाण ने भी कविता पाठ किया। इससे पूर्व मंदाकिनी शरदोत्सव के चौथे दिन के कार्यक्रमों का उद्घाटन के कार्यक्रमों का शुभारंभ नगर पालिका रुद्रप्रयाग के अध्यक्ष राकेश नौटियाल ने किया। इससे पूर्व मेले की तीसरी सांस्कृतिक संध्या लोक गायक गजेंद्र राणा और उनकी टीम के नाम रही। मौके पर मुख्य अतिथि कुलदीप रावत, मेलाध्यक्ष/नगर पंचायत अध्यक्ष अशोक खत्री, महासचिव हर्षवर्धन बेंजवाल समेत अन्य लोग मौजूद थे।
अगस्त्य पब्लिक स्कूल रहा अव्वल
अगस्त्यमुनि। लोकगीत, नृत्य, नाटिका में प्रदर्शन के आधार पर अगस्त्य पब्लिक स्कूल गंगानगर प्रथम, विद्या मंदिर अगस्त्यमुनि द्वितीय व जीजीआईसी तृतीय स्थान पर रहा। सांस्कृतिक कार्यक्रमों के तहत युवा कल्याण विभाग की ओर से महिला मंगल दलों के कार्यक्रम भी आयोजित किए गए।
रिंगाल के उत्पादों की बिक्री जोरों पर
अगस्त्यमुनि। मंदाकिनी शरदोत्सव में स्थानीय काश्तकारों की ओर से रिंगाल से बनाई गई टोकरी, कंडी, गुलदस्ता सहित अन्य उत्पादों की बिक्री जोरों पर हो रही है। स्वयं सहायता समूह के माध्यम से चार दिनों में बीस हजार से अधिक के रिंगाल से बने उत्पादों की बिक्री हो चुकी है।