गुप्तकाशी। केदारघाटी के बणसू-जाखधार की आराध्य देवी मां राजराजेश्वरी दिवारा यात्रा रात्रि प्रवास के लिए नाला गांव पहुंची। यहां ग्रामीणों ने मां भगवती का भव्य स्वागत किया। ध्याणियों और ग्रामीणों ने देवी की पूजा-अर्चना करते हुए दर्शन किए। आज सोमवार को मां भगवती नारायणकोटी गांव के लिए प्रस्थान करेंगी।
18 वर्ष के बाद बीते 8 अगस्त से शुरू हुई मां राजेश्वरी की दिवारा यात्रा को लेकर केदारघाटी के गांवों में खासा उत्साह बना हुआ है। देवशाल, देवर, रुद्रपुर, सांकरी, त्यूड़ी से होते हुए शनिवार को देवी की डोली गुप्तकाशी गांव पहुंची थी। यहां पर ग्रामीणों ने डोली का भव्य स्वागत किया। रात को गांव में कीर्तन-भजन का आयोजन भी किया गया। रविवार, सुबह विशेष पूजा-अर्चना के बाद दिवारा यात्रा को विदा किया गया। बाजार होते हुए देवी की यात्रा विश्वनाथ मंदिर पहुंची। रिमझिम बारिश के बीच आराध्य के दर्शनों के लिए भक्तों का हुजूम उमड़ पड़ा। भक्तों ने पूजा-अर्चना कर आशीष प्राप्त किया। यहां पर भक्तों ने देवी मां को भेंट और श्रृंगार सामग्री भी अर्पित की। इस मौके पर देवी अपने पश्वा पर अवरित हुई और भक्तों को आशीष दिया। दोपहर बाद भक्तों के जयकारे के साथ आराध्य को विदा किया गया। शाम को देवी की डोली नाला गांव पहुंची, जहां पर ग्रामीणों ने भव्य स्वागत किया। ध्याणियों ने विशेष पूजा-अर्चना करते हुए परिवार सहित आशीर्वाद प्राप्त किया। दिवारा समिति के अध्यक्ष राय सिंह राणा, गेंणा सिंह, दिनेश सिंह, कुंवर सिंह आदि ने बताया कि 18 वर्ष के बाद हो रही दिवारा यात्रा में प्रवासी ग्रामीण व ध्याणियों को विशेष रूप से आमंत्रित किया गया है। श्रीकृष्ण जन्माष्टमी पर मां राजराजेश्वरी केदारनाथ में बाबा केदार के दर्शन करेंगी।
केदारनाथ, गुप्तकाशी व ऊखीमठ में मनाया गया भतूज मेला
गुप्तकाशी/ऊखीमठ। केदारनाथ धाम सहित केदारघाटी के मठ-मंदिरों में रक्षाबंधन से पूर्व अन्नकूट (भतूज) मेला पारंपरिक ढंग से मनाया गया। शनिवार को रातभर मंदिरों में भक्तों ने आराध्य के भव्य रूप के दर्शन कर आशीष प्राप्त किया। केदारनाथ में बाबा केदार के स्वयंभू लिंग को पके चावल, झंगोरा और कौणी से भव्य रूप से सजाया गया था। इसके बाद फूल-मालाओं, चंदन केशर से श्रृंगार किया गया। दर्शनों के लिए रातभर मंदिर में श्रद्धालु पहुंचते रहे। रविवार को विधि-विधान के साथ मुख्य पुजारी ने स्वयंभू लिंग का श्रृंगार उतारा और श्रृंगार सामग्री को अन्यत्र स्थान पर विसर्जित किया गया। इसके बाद गंगाजल से आराध्य का जलाभिषेक कर पूजा-अर्चना की गई और अन्य दिनों की भांति बाबा केदार का श्रृंगार किया गया। इधर, विश्वनाथ मंदिर गुप्तकाशी व भोलेश्वर मंदिर ऊखीमठ में भी परंपराओं के तहत अन्नकूट मेले का आयोजन किया गया। ब्यूरो