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पांडवों की स्वर्गारोहिणी यात्रा का किया गया मंचन

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गुप्तकाशी। भगवान केदारनाथ की चल विग्रह उत्सव डोली के काशी-विश्वनाथ मंदिर पहुंचने पर केदारकाशी महोत्सव का आयोजन किया गया। इस मौके पर महाभारत पर आधारित पांडवों की स्वर्गारोहिणी यात्रा का मंचन किया गया।
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बीते शनिवार रात्रि को टीचर्स वेलफेयर एसोसिएशन द्वारा मंदिर परिसर में आयोजित कार्यक्रम में केदारनाथ के मुख्य पुजारी टी. गंगाधर लिंग बतौर मुख्य अतिथि पहुंचे। इस मौके पर उन्होंने कहा कि कार्यक्रमों से जहां लोक परंपराओं का संरक्षण होता है। वहीं, नई पीढ़ी को भी जानकारी मिलती है। इसके उपरांत स्थानीय कलाकारों ने महाभारत पर आधारित स्वर्गारोहणी यात्रा का मंचन किया। नृत्य नाटिका में वंश, ब्रह्म, गुरू व पशु हत्या के पाप से मुक्ति पाने के लिए पांडव द्रोपदी के साथ स्वर्ग की यात्रा पर निकलते है। भगवान केदार के दर्शन व हिमालय यात्रा करते हुए वह आगे बढ़ते हैं। इस दौरान द्रोपदी, सहदेव, नकुल, अर्जुन, भीम अपना देह त्याग देते हैं, लेकिन युधिष्ठिर आगे बढ़ते रहते हैं। वह, अपनी यात्रा कुत्ते के साथ पूरी करते है, जो आखिरी तक उनके साथ रहता है। स्वर्गारोहिणी की सीढ़ी चढ़ने के बाद उन्हें इन्द्रदेव मिले। उन्होंने युधिष्ठिर को अपने रथ पर सवार होने को कहा, लेकिन युधिष्ठिर अपने भाईयों और पत्नी के बिना स्वर्ग नहीं जाने की बात कहते हैं। काफी देर तक दोनों में वार्तालाप होता है और युधिष्ठिर एक शर्त पर रथ पर बैठने को तैयार होते हैं, उनके साथ चल रहा कुत्ता भी आएगा। यह बात सुनकर काला कुत्ता अपने असली रूप में आता है, जो धर्मराज का रूप था। वह युधिष्ठिर की बातों से प्रसन्न होते हैं। अकेले युधिष्ठिर ही अपने शरीर के साथ स्वर्ग पहुंचते हैं। इस मौके पर ग्राम प्रधान मदन अग्रवाल, डॉ. हर्षवर्धन बेंजवाल, राकेश शुक्ला, रघुवीर सिंह असवाल, आरके नौटियाल, राकेश असवाल, कृष्णानंद नौटियाल, सुरेशानंद नौटियाल, मुकेश अंथवाल, सुश्री लता, प्रदीप सेमवाल आदि मौजूद थे।
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