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चमराड़ा गांव से 34 परिवार हो चुके दूसरी जगह शिफ्ट

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ब्लॉक मुख्यालय अगस्त्यमुनि के ग्राम पंचायत फलई का चमराड़ा गांव पलायन से खाली होने लगा है। गांव के लिए स्वीकृत सड़क फाइलों में कैद होकर रह गई है। वहीं, पैदल मार्ग भी हादसों को न्योता दे रहा है। साथ ही यह गांव आपदा से भी प्रभावित हो चुका है।
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उत्तराखंड राज्य निर्माण के बाद से चमराड़ा के ग्रामीण सड़क की मांग कर रहे हैं, लेकिन उन्हें सिर्फ आश्वासन ही मिल रहे हैं। इन हालातों में ग्रामीणों को बाजार आने के लिए घने जंगल के बीच से डेढ़ किमी के उबड़-खाबड़ रास्ते से गुजरना पड़ रहा है। लेकिन सुध लेने वाला कोई नहीं है। विकास के इंतजार में दो दशक में यहां के 40 परिवारों में 34 पलायन कर चुके हैं। अब, सिर्फ 6 परिवार रह गए हैं। पलायन के कारण गांवों में अधिकांश घरों में ताले लटके हुए हैं, जबकि कई घर जर्जर हो चुके हैं। दूसरी तरफ जो लोग गांव में रह गए हैं, उन्हें भी रोजमर्रा के उपयोग में आने वाली वस्तुओं की खरीद के लिए डेढ़ किमी का सफर तय करना पड़ता है।
भगवती प्रसाद थपलियाल, प्रकाश थपलियाल, देवी प्रसाद थपलियाल ने बताया कि चमराड़ा गांव को सड़क से जोड़ने के लिए विधायक सहित अन्य कई जनप्रतिनिधियों को पत्र भेजा गया। प्रधान विजयपाल सिंह राणा ने बताया कि तिमली सड़क से मरघट-चमराड़ा के लिए स्वीकृत सड़क की सर्वे भी हो चुकी है, लेकिन लोनिवि द्वारा निर्माण नहीं किया गया है। साथ ही जून 2013 की आपदा से प्रभावित चमराड़ा गांव के कई परिवारों को मुआवजा भी नहीं मिल पाया है।
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