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त्रियुगीनारायण में भगवान नारायण के दर्शनों को उमड़े श्रद्धालु

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गुप्तकाशी। बामन भगवान की भोग मूर्ति को चांदी की थाल में विराजमान कर जैसे ही गर्भगृह से बाहर लाया गया तो पूरा क्षेत्र आराध्य की जयकारों से गूंज उठा। हजारों की संख्या में पहुंचे भक्त इस अद्भुत क्षण के साक्षी बने। मंदिर में भक्तों द्वारा भगवान नारायण का जन्मोत्सव भी मनाया गया।
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नारायण सेवा समिति व ग्राम पंचायत त्रियुगीनारायण के सहयोग से त्रियुगीनारायण मंदिर में आयोजित तीन दिवसीय बामन द्वादशी मेला के दूसरे दिन सुबह से ही केदारघाटी सहित जनपद के अन्य व बाहरी क्षेत्रों से भी श्रद्धालुओं की भीड़ मंदिर में जुटी रही। इस दौरान कई भक्तों ने परिवार के साथ भगवान की पूजा कर भेंट अर्पित की। प्रात: 9 बजे पुजारी मुकुंदराम जमलोकी, कल्पेश जमलोकी, शिव प्रसाद जमलोकी, विजय राम जमलोकी सहित अन्य ने आराध्य नारायण भगवान की विशेष पूजा-अर्चना की। इस मौके पर भगवान की भोगमूर्ति को पंच स्नान कराने के बाद श्रृंगार कर आरती उतारी गई। दोपहर को विधि-विधान व धार्मिक परंपराओं के तहत शेरसी के नौटियाल परिवार द्वारा नारायण भगवान व भैरवनाथ की भोग मूर्तियों को चांदी की थाल में विराजमान कर गर्भगृह से बाहर लाया गया। इस दौरान वैदिक मंत्रोच्चारण, पूजा-अर्चना और ढोल-दमाऊं की थाप पर पूरा त्रियुगीनारायण मंदिर परिसर आराध्य के जयकारों से गूंज उठा। भगवान नारायण की डोली ने त्रियुगीनारायण मंदिर की 11 परिक्रमा की। इस अवसर पर आराध्य अपने पश्वा पर अवतरित हुए और भक्तों को फूल-अक्षत देकर आशीर्वाद दिया। सभी धार्मिक औपचारिकताओं के बाद भोगमूर्तियों को मूर्तियों को गर्भगृह में स्थापित किया गया। मंदिर में भक्तों द्वारा भगवान नारायण का जन्मोत्वस भी मनाया गया। साथ ही जंगल से लाई गई मोरू की डाली को मंदिर परिसर में स्थापित कर पूजा-अर्चना की गई। मेला में जिले व अन्य क्षेत्रों से लगभग चार हजार श्रद्धालु पहुंचे थे। महिलाओं द्वारा यहां रात्रि को भजन कीर्तन में किए गए। इस मौके पर समिति अध्यक्ष एआर भट्ट, शिव प्रसाद, अरविंद जमलोकी, जगमोहन भट्ट, राजेश भट्ट, गिरीश चंद्र, महादेव प्रसाद, आशीष गैरोला आदि लोग मौजूद थे।


40 दंपतियों ने संतान प्राप्ति का आशीष लिया
गुप्तकाशी। भगवान त्रियुगीनारायण के मंदिर में रात्रिभर खड़ दिए पूजन कर 40 दंपतियों ने संतान प्राप्ति का आशीष लिया। शुक्रवार को विधि-विधान के साथ दंपतियों ने दीए को मालू के पत्ते में रखकर कुंड में विसर्जित किया।
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