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पांच वर्ष बाद मध्य हिमालय के बुग्यालों में गिरी 5 से 6 फीट बर्फ

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विनय बहुगुणा
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रुद्रप्रयाग। बीते दिनों हुई बर्फबारी से भले ही पहाड़ों में जनजीवन बुरी तरह प्रभावित हुआ हो, लेकिन प्रकृति द्वारा बरसाई गई यह नेमत आने वाले दिनों का सुखद संदेश है। विशेषज्ञ इसे पर्यावरण के लिए सही समय पर मिला वरदान बता रहे हैं। पांच वर्ष के बाद मध्य हिमालय में इतनी बर्फबारी हुई है, जिससे बुग्यालों और निचले इलाके की जमीन को पर्याप्त नमी मिल चुकी है। साथ ही गाड़-गदेरों के स्रोत भी रिचार्ज होने लगे हैं।
मध्य हिमालय में ढाई से तीन हजार फीट की ऊंचाई पर स्थित बनियाकुंड, चोपता, देवदर्शनी, तुंगनाथ, चंद्रशिला, वेदनी और ऑली बुग्याल सहित अन्य ऊंचाई वाले स्थानों पर वर्ष 2014-15 के बाद इस वर्ष 21 जनवरी से सात फरवरी तक पांच से छह बार 5 से 7 फीट तक बर्फबारी हो चुकी है। हेमवती नंदन बहुगुणा केंद्रीय विवि के उच्च शिखरीय पादप शोध संस्थान के अनुसार बीते पांच वर्षों में पहली बार चोपता, बुच्चगली, देवदर्शनी और तुंगनाथ में फीट के हिसाब से बर्फबारी हुई है। संस्थान के वैज्ञानिक डॉ. बीएस मेंगवाल के अनुसार बीते वर्षों में मार्च में बुग्याल दरकने लगते थे, लेकिन इस बार हुई बर्फबारी से वे ग्रीष्मकाल में भी पूरी तरह नम रहेंगे। ऐसे में वहां उगने वाली मुलायम मखमली घास वर्षभर हरीभरी रहेगी। साथ ही ऊंचाई वाले इलाकों में पाए जाने वाले फूल व जड़ी-बूटियों का जीवनकाल भी बढ़ेगा।
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ग्लेशियरों को मिली मजबूती
विशेषज्ञों का कहना है कि बीते 20 दिनों में हुई भारी बर्फबारी से हिमालय की चोटियों के साथ तलहटी पर स्थित ग्लेशियरों को मजबूती मिली है। केदारनाथ पैदल मार्ग पर रामबाड़ा से रुद्रा प्वाइंट तक ग्लेशियर जोन बर्फ से लकदक हो चुके हैं। इस बार बाबा के दर्शनों को केदारनाथ पहुंचने वाले श्रद्धालुओं को ग्लेशियर के दर्शन भी होंगे।
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इनका कहना है --
जनवरी-फरवरी में मध्य हिमालय के ऊपरी बुग्यालों और ग्लेशियर को पर्याप्त बर्फ मिली है, जो सुखद संकेत है। हिमालय व उसकी तलहटी पर जितनी अधिक नमी रहेगी, उससे पर्यावरण को उतना अधिक लाभ मिलेगा। सूखने के कगार पर पहुंच चुके पेयजल स्रोतों को भी नया जीवन मिला है, जो प्रकृति के लिए सबसे अहम है। इससे जहां बस्ती क्षेत्रों को पर्याप्त पानी मिलेगा, वहीं खेती भी अच्छी होगी।
-प्रो. रमेश चंद्र शर्मा, विभागाध्यक्ष पर्यावरण विज्ञान अनुभाग, एचएनबी केविवि श्रीनगर गढ़वाल
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