ऊखीमठ।
देवरियाताल अगले 10 वर्ष में सूख सकता है। ताल का मुख्य स्रोत पर पानी कम हो रहा है, जिससे इसका जलस्तर तेजी से घट रहा है। बीते पांच वर्षों में भी ताल का जलस्तर की गहराई 23 मीटर से घटकर 17 मीटर हो गई है। भूगर्भ वैज्ञानिकों ने भी देवरियात के संरक्षण और वहां चारों तरफ अधिकाधिक पौधारोपण पर जोर दिया है।
समुद्रतल से 2438 मीटर ऊंचाई पर स्थित देवरियाताल ऊखीमठ ब्लाक की ग्राम पंचायत सारी से करीब तीन किमी ऊपर वन क्षेत्र में स्थित है। ताल 280 मीटर लंबा और 260 मीटर चौड़ाई में फैला है। यह प्राकृतिक ताल है, जो पूरे साल पानी से लबालब रहता है, लेकिन जलवायु परिवर्तन और देश-विदेश के पर्यटकों की आवाजाही का असर देवरियाताल पर साफ दिखने लगे हैं। बीते वर्षों से ताल का जलस्तर तेजी से घट रहा है। कुमाऊं विश्वविद्यालय नैनीताल के भू-गर्भ विज्ञान के प्रोफेसर बीएस कोटलिया ने इस वर्ष 15 से 20 मई तक देवरियाताल का वृहद अध्ययन किया। उन्होंने ताल के जलस्तर की गहराई की माप के साथ ही उसके स्रोत का अध्ययन किया। उन्होंने बताया कि ताल के चारों तरफ जलस्तर कम हो रहा है, साथ ही ताल के एकमात्र स्रोत से भी पानी काफी कम हो रहा है, जो सबसे बड़ा चिंता का कारण है। उन्होंने ताल में गिरे टूटे पेड़ों और अन्य प्रकार के कचरे की सफाई पर जोर देते हुए कहा कि यहां पहुंच रहे पर्यटक साबुन और वाशिंग पाउडर का इस्तेमाल कर रहे हैं, जो नुकसानदायक साबित हो रहा है। प्रो. कोटलिया के अनुसार वर्ष 2013 में देवरियाताल में जलस्तर की गहराई 23 मीटर मापी गई थी, जो इस वर्ष मात्र 17 मीटर रह गई है। जिस रफ्तार से ताल का जलस्तर घट रहा है, उससे आने वाले 10 वर्षों में यह कीचड़ में तब्दील हो जाएगा। बताया कि ताल के पश्चिम व दक्षिण क्षेत्र में वृहद स्तर पर पौधारोपण की जरूरत है। साथ ही पर्यटकों द्वारा ताल में साबुन, शैंपू आदि के उपयोग पर सख्ती से रोक लगनी चाहिए। उन्होंने ताल के चारों तरफ सुरक्षा दीवार के निर्माण की बात कही है।
टेंट लगानी की नहीं मिलेगी अनुमति
ऊखीमठ। केदारनाथ वन्य जीव प्रभाग ने भी देवरियाल ताल में पहुंच रहे पर्यटकों को टेंट लगाने की अनुमति देने से इंकार कर दिया है। अब, यहां पर्यटक रात्रि प्रवास नहीं कर सकेंगे। साथ ही वन विभाग के अधिकारी वहां संपादित गतिविधियों पर नजर रखेंगे। वन विभाग द्वारा घोड़ा-खच्चरों को भी ताल के क्षेत्र में नहीं जाने दिया जा रहा है। ब्यूरो