रुद्रप्रयाग। आगामी नौ मई से शुरू हो रही केदारनाथ यात्रा में इस बार बाबा के दर्शनों को आने वाले देश-विदेश के श्रद्धालुओं को पैदल मार्ग पर विशालकाय हिमखंडों के दर्शन भी होंगे। रामबाड़ा से रुद्रा प्वाइंट तक कई जगहों पर विशालकाय हिमखंड फैले हुए हैं, जिन्हें काटकर रास्ता तैयार किया जा रहा है। कई हिमखंड तो 45 फीट से अधिक लंबाई क्षेत्र में फैले हुए हैं। वर्ष 2015 में भी पैदल मार्ग पर 8 से 9 फीट बर्फ को काटकर रास्ता बनाया गया था।
11500 फीट की ऊंचाई पर स्थित केदारनाथ में इस बार भारी बर्फबारी हुई है। मंदिर परिसर से मंदिर मार्ग व समूची केदारपुरी 12 से 14 फीट बर्फ से ढकी है। गौरीकुंड-केदारनाथ पैदल मार्ग भी भीमबली से केदारनाथ तक बर्फ से लकदक है। रामबाड़ा, छोटी लिनचोली, बड़ी लिनचोली से तक सात से अधिक ग्लेशियर जोन हैं। इन स्थानों पर पैदल मार्ग 30 से 45 फीट लंबाई में हिमखंड पसरे हुए हैं, जिन्हें पार करना आसान नहीं है। अगर, कपाट खुलने तक भी मौसम साफ रहता है, तो तब भी यहां विशालकाय हिमखंड दिखेंगे। ऐसे में 9 मई से शुरू हो रही बाबा केदार के दर्शनों को आने वाले श्रद्धालुओं को इस बार मार्ग पर ग्लेशियर के साक्षात दर्शन होंगे और वे बर्फ को काटकर बनाए गए रास्ते के बीच से गुजरते हुए धाम पहुंचेंगे। बीते 24 मार्च से डीडीएमए द्वारा बर्फ सफाई का कार्य जोरों पर किया जा रहा है। रविवार को और मजदूर वहां पहुंच गए हैं। विदित हो कि वर्ष 2015 में भी यात्रा के लिए लिनचोली से छानी कैंप तक कई स्थानों पर बर्फ को काटकर रास्ता तैयार किया गया था।
पैदल मार्ग पर रामबाड़ा से रुद्रा प्वाइंट के मध्य ग्लेशियर जोन सक्रिय है। इन स्थानों पर बर्फ सफाई के कार्य में भी खतरा बना हुआ है। अधिकांश हिमखंड 25 फीट से अधिक क्षेत्र में फैले हुए हैं। इस बार ग्रीष्मकाल तक इनके बने रहने की संभावना है।
-- दीपचंद्र नवानी, एई डीडीएमए (लोनिवि) गुप्तकाशी