रुद्रप्रयाग। जिला एवं सत्र न्यायाधीश हरीश कुमार गोयल ने न्यायिक मजिस्ट्रेट (जेएम) के फैसले को पलट दिया। जेएम ने एक ज्वैलर्स की अपील पर परकाम्या अधिनियम के तहत आरोपी को छह माह के कारावास और 5 लाख, 60 हजार रुपये के अर्थदंड की सजा सुनाई थी। जिला जज ने कहा कि काल्पनिक लेनदेन और कर्ज की धनराशि सभी शर्तों के तहत ब्याज सहित चुकता करने के बाद केस का कोई औचित्य नहीं रह जाता। उन्होंने ज्वैलर्स को भी सख्त हिदायत दी।
अधिवक्ता अरुण प्रकाश बाजपेयी और गंभीर सिंह रावत ने आनंद सिंह कंडारी की ओर से जिला न्यायालय में दायर अपील में कहा है कि वर्ष 2014 में आनंद सिंह कंडारी (कंडारी मेडिकल स्टोर) ने ज्वैलर्स सुनील वर्मा से कुछ धनराशि कर्ज के रूप में ली थी। तब जमानत के तौर पर कंडारी ने कुछ चेक वर्मा को दिए थे। 14 अक्तूबर 2014 को कर्ज ली गई राशि का ब्याज सहित चेक के माध्यम से भुगतान कर दिया गया। भुगतान लेने के बाद भी ज्वैलर्स वर्मा द्वारा कंडारी के खिलाफ 27 अक्तूबर 2016 को चेक बाउंस का वाद कोर्ट में दायर कर दिया गया। मामले में सुनवाई करते हुए न्यायिक मजिस्ट्रेट आरती सरोहा ने आनंद सिंह कंडारी को परकाम्या अधिनियम के तहत दोषी मानते हुए आठ सितंबर, 17 को छह माह के कारावास और 5 लाख, 60 हजार रुपये के अर्थदंड की सजा सुनाई थी।
सजा के खिलाफ आनंद सिंह कंडारी की ओर से 26 सितंबर 2017 को जिला न्यायालय में अपील दायर कर दी गई। जिला एवं सत्र न्यायाधीश ने 30 अक्तूबर को हुई अंतिम सुनवाई के बाद तीन नवंबर को अपना फैसला सुनाया। फैसले में कहा गया कि सुनील वर्मा और आनंद कंडारी के मध्य कोई व्यावसायिक संबंध नहीं थे। 25 लाख रुपये के काल्पनिक लेनेदेन के आधार पर कर्ज के रूप में ली गई पांच लाख रुपये की राशि मय ब्याज के लौटा दी गई। इसके बाद सुनील वर्मा द्वारा गलत तरीके से 138 एनआई एक्ट का वाद दायर किया गया, जो कानूनन जुर्म की श्रेणी में आता है। जिला न्यायाधीश ने निचली अदालत के आदेश को पलटते हुए अपीलार्थी आनंद सिंह कंडारी को मामले में दोषमुक्त करार दिया। इधर, अधिवक्ता अरुण प्रकाश बाजपेयी ने बताया कि सुनील वर्मा के चेक बाउंस से संबंधित 18 मुकदमे न्यायालय में चल रहे हैं। वर्मा के पास साहूकारी लाइसेंस नहीं हैं, ऐसे में उसके द्वारा रुपयों का लेनदेन गैर कानूनी है। उन्होंने प्रशासन और पुलिस से मामले की जांच किए जाने की मांग की है।