ऊखीमठ। लामबगड़-पनपितया-मद्महेश्वर ट्रैक पर आशिका ताल में मृतक ट्रैकर के शव के साथ रुके 8 पोर्टरों को लेकर रेस्क्यू दल मद्महेश्वर पहुंच गया है। शनिवार को हेलीकॉप्टर से शव और पोर्टरों को गुप्तकाशी लाया जाएगा। इधर, बीते बृहस्पतिवार रात्रि को 8 ट्रैकर ऊखीमठ पहुंच गए थे।
शुक्रवार तड़के थानाध्यक्ष होशियार सिंह पंखोली के नेतृत्व में पुलिस-प्रशासन के 13 सदस्यीय रेस्क्यू दल ने सजल सरोवर से 8 पोर्टल व मृतक ट्रैकर अरुण कुमार दास के शव को लेकर आगे बढ़ना शुरू किया। दोपहर को दल कातिनी पहुंचा। जहां पर रेस्क्यू दल की दूसरी टीम एसडीआरएफ के हाईअल्टीट्यूड माउंट एवरेस्ट पर रेस्क्यू करने वाले 6 जवान मौजूद थे। इन जवानों द्वारा पोर्टरों को भोजन व पानी दिया गया। अल्प विश्राम के बाद दोनों रेस्क्यू दल पोर्टरों व शव को लेकर आगे बढ़े और शाम 5 बजे मद्महेश्वर धाम पहुंचे। रात्रि प्रवास के बाद शनिवार को सभी 8 पोर्टरों व शव को हेलीकॉप्टर से गुप्तकाशी लाया जाएगा। इसके बाद आगे की कार्रवाई होगी। एसडीएम गोपाल सिंह चौहान ने बताया कि 23 सदस्यीय ट्रैकिंग दल में 8 ट्रैकर्स बृहस्पतिवार रात को ऊखीमठ पहुंच गए थे। इसके अलावा 2 गाइड व 6 पोर्टर भी बुधवार को पहुंच गए थे, जो अपने घरों को जा चुके हैं। मृतक ट्रैकर के घर सूचना पहुंचा दी गई है। 5 जून को लामबगड़ के खीरों नदी से पश्चिम बंगाल के 9 ट्रैकर्स ने 12 पोर्टर व 2 गाइड के साथ मद्महेश्वर के लिए ट्रैकिंग शुरू की थी, लेकिन 11 जून को यह दल पनपतिया ग्लेशियर के सजल सरोवर में फंस गया था। जहां दल में शामिल एक ट्रैकर की मौत हो गई थी, जिसके बाद यहां रेस्क्यू शुरू किया गया।
ट्रैकर के पास आईएमएफ की अनुमति
ऊखीमठ। पश्चिम बंगाल के 8 ट्रैकर्स ने बताया कि उन्होंने लामबगड़-पनपतिया-मद्महेश्वर ट्रैक पर ट्रैकिंग के लिए आईएमएफ (इंडियन माउंटनेरिंग फाउंडेशन) से अनुमति ली है। उनके पास फाउंडेशन से 11 सदस्यीय दल की ट्रैकिंग का 29 जनवरी 2018 का अनुमति पत्र है। दल में शामिल सइकत मन्ना ने बताया कि दो लोग स्वास्थ्य कारणों के चलते साथ में नहीं आ पाए थे। इसलिए 2 जून को हमारा 9 सदस्यी दल हावड़ा से रवाना हुआ। 4 जून को हम जोशीमठ पहुंचे और 5 को लामबगड़। लेकिन यहां ट्रैकिंग करते हुए न तो हमें किसी ने रोका और न हमसे कोई अनुमति पत्र मांगा।