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मद्महेश्वर घाटी के स्कूलों को शिक्षक व संसाधनों का इंतजार!

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ऊखीमठ। विकासखंड के मद्महेश्वर घाटी में सरकारी शिक्षण व्यवस्था हाशिए पर आ गई है। यहां संचालित प्राथमिक और माध्यमिक स्कूल शिक्षक व संसाधनों के अभाव में चल रहे हैं। शिक्षकों की कमी से छात्र-छात्राओं को खासी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। जनप्रतिनिधियों व ग्रामीणों ने शासन व शिक्षा विभाग से तत्काल शिक्षकों की तैनाती की मंाग की है।
मनसूना न्याय पंचायत के गौंडार, रांसी, उनियाणा, राउलेंक, जग्गी-बगवान, बेडूला, बुरूवा, गडगू, गैड, गिरीया, मनसूना, पाली-सरूणा और फाफंज गांव के बच्चे माध्यमिक शिक्षा के लिए जीआईसी मनसूना, राउलेंक और रांसी जाते हैं। लेकिन मनसूना व राउलेंक में जहां वर्तमान शिक्षण सत्र में 7-7 पद रिक्त चल रहे हैं। वहीं, उच्चीकरण के दो वर्ष बाद भी जीआईसी रांसी में भी प्रवक्ताओं की तैनाती नहीं हो पाई है। इन विद्यालयों में जरूरी संसाधन भी नहीं हैं। यहीं नहीं, राजूहा हाईस्कूल गौंडार, उनियाणा, बुरूवा में गणित, विज्ञान के शिक्षकों के पद खाली पड़े हुए हैं। जबकि चौखंभा जूनियर हाईस्कूल में शिक्षकों के सभी पद रिक्त हैं। इन हालातों में गांवों से स्कूल पहुंच रहे नौनिहालों को खासी मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है। मद्महेश्वर घाटी विकास मंच के संस्थापक राकेश नेगी का कहना है कि क्षेत्र में सरकारी शिक्षा व्यवस्था हाशिए पर है। शिक्षकों के अभाव में स्कूलों में पठन-पाठन प्रभावित हो रहा है। ग्राम पंचायत गौंडार की प्रधान सुमन देवी का कहना है कि 10 से अधिक छात्र-छात्राएं हाईस्कूल व इंटर की पढ़ाई के लिए दो तरफा 12 किमी पैदल नाप रहे हैं, लेकिन जीआईसी रांसी में शिक्षक हीं नहीं हैं।
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मुख्य शिक्षाधिकारी सीएन काला ने बताया कि स्कूलों में रिक्त पदों के बारे में निदेशालय को रिपोर्ट भेज दी गई है। साथ ही जर्जर भवनों की मरम्मत व पुनर्निर्माण को लेकर आपदा मद, जिला व राज्य सेक्टर में प्रस्ताव तैयार किए जा रहे हैं।
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