रुद्रप्रयाग। श्री शक्ति संस्कृति एवं सांस्कृतिक ट्रस्ट के सहयोग से नया बस अड्डा में आयोजित रामलीला के तीसरे दिन सीता स्वयंवर का मंचन किया गया। इस मौके पर हास्य व्यंग और पात्रों के शानदार अभिनय से दर्शक देर रात्रि तक पांडाल में जमे रहे।
महर्षि विश्वामित्र के साथ राम-लक्ष्मण मिथलानगरी में राजा जनक के दरबार में पहुंचते हैं। यहां, सीता के स्वयंवर में कई देशों के राजा-महाराजा पहुंचते हैं, लेकिन कोई भी धनुष को हिला नहीं पाते। इधर, महर्षि विश्वामित्र की अनुमति पर राम, शिव धनुष को तोड़ देते हैं। उनका सीता के साथ विवाह होता है। उधर, ऊखीमठ में संयुक्त रामलीला कमेटी के तत्वाधान में आयोजित रामलीला के चौथे दिन राम वनवास का मंचन किया गया। मंथरा द्वारा महारानी कैकेयी को बहकाना और महारानी का महाराज दशरथ से राम को 14 वर्ष का वनवास और अपने पुत्र भरत को राजगद्दी के वचन पर पात्रों का अभिनय जोरदार रहा। राम-लक्ष्मण व सीता का वन गमन, केवट का तीनों को सरयू नदी पार कराने के दृश्य मार्मिक रहे। समिति के अध्यक्ष प्रेम सिंह पुष्पवाण ने नगरवासियों से मिल रहे सहयोग के प्रति आभार जताया। इस मौके पर मोहन सिंह रावत, राजेंद्र सिंह नेगी, पीएस नेगी, किशन बगवाड़ी, शिव सिंह पंवार, नवीन शैव, रघुवीर सिंह आदि थे। ब्यूरो