रुद्रप्रयाग। श्री बदरीनाथ और केदारनाथ यात्रा के मुख्य पड़ाव रुद्रप्रयाग में नगर पालिका गठन के डेढ़ दशक बाद भी कूड़ा निस्तारण का उचित प्रबंधन नहीं हो पाया है। नगर से हर दिन निकलने वाला करीब 6 क्विंटल जैविक और अजैविक कूड़ा अलकनंदा नदी में डाला जा रहा है। यहीं स्थिति नगर पंचायत तिलवाड़ा, अगस्त्यमुनि और ऊखीमठ की भी है, जहां कचरे को मंदाकिनी नदी और स्थानीय गदेरों में फेंका जा रहा है।
नगर पालिका के 7 वार्डों में बंटे रुद्रप्रयाग नगर क्षेत्र से हर दिन करीब 6 क्विंटल कूड़ा एकत्र किया जा रहा है, मगर पालिका न तो कूड़े की अलग-अलग छटनी कर रही है और न ही इसके निस्तारण की उचित व्यवस्था कर रही है। बल्कि इस कूड़े को मुख्यालय से पांच किमी दूर ऋषिकेश-बदरीनाथ राजमार्ग पर रैंतोली में अलकनंदा नदी किनारे फेंका जा रहा है। यहां पालिका का कूड़ा डंपिंग यार्ड प्रस्तावित है, जो पांच वर्ष से निर्माणाधीन है। दूसरी ओर पालिका द्वारा यहां स्थापित कॉम्पेक्टर मशीन भी दो वर्ष से खराब पड़ी है। उधर, नगर पंचायत तिलवाड़ा व अगस्त्यमुनि नगर पंचायत भी अपने यहां का कूड़ा मंदाकिनी नदी में फेंक रही है। इन दोनों कस्बों से हर दिन लगभग 10 क्विंटल कूड़ा नदी में फेंका जा रहा है। उधर, ऊखीमठ में भी कूड़ा निस्तारण की कोई सुविधा नहीं है। यहीं नहीं, केदारनाथ, द्वितीय केदार मद्महेश्वर, तृतीय केदार तुंगनाथ सहित यात्रा मार्ग के मुख्य पड़ाव गुप्तकाशी, सोनप्रयाग और गौरीकुंड में भी कूड़ा निस्तारण के लिए कोई व्यवस्था नहीं है। प्रभारी अधिशासी अधिकारी, नगर पालिका, रुद्रप्रयाग संजय सिंह रावत का कहना है कि एक सप्ताह में डंपिंग यार्ड का कार्य पूरा हो जाएगा। साथ ही कॉम्पेक्टर मशीन भी शुरू कर दी जाएगी। मशीन से बिखरे हुए कूड़े को एक स्थान पर डंप किया जा रहा है। पॉलीथिन की भी छटाई की जा रही है।