गुप्तकाशी। खोन्नू गांव में सात दिवसीय नाग नृत्य के अंतिम दिन कालिया नाग के मर्दन (पराजित) करने की लीला का मंचन किया गया। इस दौरान श्री कृष्ण नाग के फनों पर नृत्य करते हुए कालिंदी नदी से ऊपर आते है।
कालीमठ घाटी के खोन्नू गांव में सात दिवसीय नाग नृत्य का धार्मिक अनुष्ठान के साथ समापन हो गया है। भगवान श्रीकृष्ण की बाल लीलाओं पर आधारित नाग नृत्य के अंतिम दिन वैदिक मंत्रोच्चारण के साथ पूजा-अर्चना की गई। इस अवसर पर क्षेत्र व विश्व कल्याण के लिए यज्ञ में सुख समृद्धि के लिए आहुतियां दी गई। इससे पूर्व अनुष्ठान में भगवान श्रीकृष्ण द्वारा कालिंदी नदी में कालिया नाग के मर्दन करने की लीला का मंचन किया गया। भगवान श्रीकृष्ण अपने साथियों के साथ नदी किनारे गेंद खेलते रहते हैं। इस दौरान गेंद नदी में गिर जाती है। ग्वाल-बाल परेशान हो जाते हैं। तब, बाल श्रीकृष्ण गेंद लाने के लिए नदी में छलांग लगाते हैं। वहां, कालिया नाग के द्वारपाल सिध्वा व विध्वा को पराजित करते हैं। इसके बाद श्रीकृष्ण का कालिया नाग से युद्ध होता है, जिसमें नाग हार मान लेता है। श्रीकृष्ण नाग के फनों पर नृत्य करते हुए हाथ में गेंद लेकर नदी से ऊपर आते हैं, जिसे देखकर सारे ग्वाल-बाल खुश हो जाते हैं। पारंपरिक वाद्य यंत्रों की थाप पर पश्वाओं द्वारा इस लीला का मंचन किया गया। आयोजन समिति के अध्यक्ष मुकंदी सिंह सत्कारी व उपाध्यक्ष अव्वल सिंह ने बताया कि 4 से 10 दिसंबर तक आयोजित हुए इस अनुष्ठान में कोटमा, मंजीरा, कविल्ठा, कालीमठ, जाल तल्ला, मल्ला, ब्यूंखी, स्यास्यूं, चौमासी, चिलौंड, कुणजेठी सहित गुप्तकाशी, ऊखीमठ क्षेत्र से भी भारी संख्या में लोग आयोजन में पहुंचे। इस दौरान ध्याणियों को सम्मानित करते हुए आयोजन समिति द्वारा उन्हें भेंट अर्पित की गई।