रुद्रप्रयाग। पलायन से वीरान पड़े बर्सू गांव की बंजर खेती को फिर से हराभरा करने के लिए सिंचाई विभाग ने कवायद शुरू कर दी है। अधिकारियों ने गांव का भ्रमण कर वहां की पुरानी सिंचाई नहर का निरीक्षण करते हुए मरम्मत को लेकर प्रारंभिक खाका तैयार किया है। विभाग द्वारा यहां के मूल ग्रामीणों से वार्ता कर नहर को ठीक किया जाएगा।
रुद्रप्रयाग-बौंठा-तूना मोटर मार्ग पर जिला मुख्यालय से करीब चार किमी की दूरी पर स्थित बर्सू गांव एक दशक से पलायन से जनशून्य हो चुका है। यहां चारों तरफ जंगली झाड़ी व घास उगी है और खेत-खलियान बंजर पड़े हैं। अभी बर्सू गांव में विजय सेमवाल चार वर्ष से खेती कर रहा है। उन्होंने यहां पांच नाली भूमि मजदूरों की मदद से खेती लायक बनाई है, जिसके लिए तीन किमी दूर से प्लास्टिक के पाइप के जरिए पानी लाया गया है। इन दिनों यहां मटर, प्याज, राई, पालक आदि का उत्पादन हो रहा है। अब जल्द ही बर्सू गांव में रौनक लौटेगी और खेतों में फिर से हरियाली लहलहाएगी। सिंचाई विभाग की ओ रसे गांव की सिंचाई नहर की मरम्मत की जाएगी। इसके लिए विभागीय अधिशासी अभियंता ने गांव व नहर का प्रारंभिक सर्वेक्षण किया है। नहर की मरम्मत के लिए जिला योजना में 8 लाख का बजट रखा गया है।
कोट
बर्सू गांव की सिंचाई नहर का जायजा लिया गया है। इसकी मरम्मत के लिए जिला योजना में बजट रखा गया है। जल्द ही प्रवासी ग्रामीणों के साथ बातचीत कर मरम्मत का कार्य शुरू किया जाएगा। - प्रताप सिंह बिष्ट, ईई सिंचाई खंड रुद्रप्रयाग।