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मिनी बैंक दैड़ा में जांच को गई दो सदस्यीय टीम बैरंग लौटी

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ऊखीमठ। साधन सहकारी मिनी बैंक दैड़ा में लाखों रुपये के गबन की जांच को पहुंची दो सदस्यीय जांच दल को सहकारिता सचिवों की हड़ताल के चलते बैंक में ताला लटके होने के कारण बैरंग लौटना पड़ा। वहीं, क्षेत्रीय काश्तकारों ने हेराफेरी की जांच की मांग करते हुए नारेबाजी के साथ प्रदर्शन किया। गया। सहकारिता विभाग की ओर से 20 से अधिक लोगों को 6 लाख 40 हजार रुपये की वसूली के नोटिस भेजे गए हैं।
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डीएम के आदेश पर मंगलवार को अपर जिला सहकारी अधिकारी वाईएस बिष्ट और सहायक विकास अधिकारी सहकारिता विजय भट्ट मिनी बैंक की वित्तीय जांच के लिए दैड़ा पहुंचे थे, लेकिन वहां ताले लटके मिले। इस दौरान जांच दल ने वहां के काश्तकारों, जनप्रतिनिधियों व अन्य से बातचीत कर जरूरी जानकारियां भी जुटाई। जांच अधिकारी बिष्ट व भट्ट ने बताया कि सहकारिता सचिवों की हड़ताल से बैंक बंद था। अब, हड़ताल समाप्त होने के बाद मामले की जांच की जाएगी। दूसरी तरफ मिनी बैंक से जुड़े नाराज काश्तकारों व ग्रामीणों ने पूर्व में तैनात बैंक प्रबंधन पर ग्राहकों को गुमराह करने का आरोप लगाया। इस दौरान नारेबाजी कर बैंक परिसर के बाहर धरना भी दिया। पूर्व प्रमुख फते सिंह रावत का कहना है कि उन्होंने वर्ष 2010 में मिनी बैंक में 1 लाख 24 हजार 276 रुपये की सावधी जमा कराई थी, जिसे 2012 में पूरा होना था, लेकिन बैंक की ओर से यह धनराशि उन्हें आज तक वापस नहीं दी गई। बल्कि 40 हजार का फर्जी ऋण अंकित करा दिया। बंशीधर नौटियाल ने बताया कि मिनी बैंक से लिए गए ऋण पर पासबुक में 20 हजार रुपये बकाया दिखाया गया है, लेकिन वसूली का जो नोटिस भेजा गया है, उसमें 2 लाख 91 हजार 165 रुपये अंकित है। ग्राम पंचायत सारी के ग्राम प्रधान घनश्याम लाल का कहना है कि मिनी बैंक से उन्होंने ऋण लिया था, जिसेे जमा भी कर दिया गया था। शेष 15 हजार रुपये जमा करने थे, लेकिन बैंक ने उन्हें 77 हजार 144 रुपये का नोटिस भेजा है। इसी तरह क्षेत्र के 20 से काश्तकारों, जो बैंक से जुड़े थे, को वसूली नोटिस भेजे गए हैं। बताया जा रहा है कि मिनी बैंक दैड़ा में धांधली की पूर्व में संस्थान स्तर पर जांच कराई गई थी, जिसमें करीब 29 लाख का गबन सामने आया था। यह प्रकरण न्यायालय में विचाराधीन है।
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मिनी बैंक दैडा में वर्ष 2010-11 में तत्कालीन सचिव द्वारा वित्तीय धांधली की गई थी। कुछ समय बाद उनकी मौत हो गई, लेकिन यह प्रकरण निस्तारित नहीं हो पाया। अब, पुन: मामले की जांच शुरू की जा रही है। सचिवों की हड़ताल समाप्त होते ही मिनी बैंक के सभी दस्तावेजों व काश्तकारों को भेजे गए नोटिसों का पूरी निरीक्षण किया जाएगा। इसके बाद ही पूरी स्थिति साफ हो पाएगी।
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-- योगेश जोशी, निबंधक सहकारिता रुद्रप्रयाग
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