रुद्रप्रयाग। उप जिलाधिकारी गोपाल सिंह चौहान के नेतृत्व में प्रशासन व राजस्व विभाग की टीम ने गौरीकुंड में सरकारी भूमि पर अतिक्रमण को ध्वस्त किया। टीम ने निर्माणाधीन 30 आवासीय/व्यावसायिक भवनों को तोड़ा। इस दौरान टीम की भवन स्वामियों व स्थानीय लोगों के साथ तीखी नोकझोंक भी हुई। प्रभावितों ने प्रशासन पर बिना सूचना के भवनों को ध्वस्त करने का आरोप लगाया। कहा कि प्रशासन ने सोनप्रयाग में वार्ता के लिए बुलाया और पीछे से भवनों को ध्वस्त कर दिया।
प्रशासन और राजस्व विभाग की टीम ने गौरीकुंड में सरकारी भूमि पर अतिक्रमण पैदल यात्रा मार्ग पर दोनों तरफ निर्माणाधीन 30 भवनों का ध्वस्त किया। भवन स्वामियों ने इसका विरोध किया लेकिन प्रशासन ने उनकी नहीं सुनीं। अधिकारियों ने कहा कि जून 2013 के सभी आपदा प्रभावितों को मुआवजा दिया जा चुका है और प्रभावित अब यहां अतिक्रमण कर रहे हैं। पटवारी, तहसीलदार की ओर से पूर्व में कई बार निर्माण न करने को कहा था, लेकिन इन्होंने काम बंद नहीं किया। दूसरी ओर प्रभावितों ने ऊखीमठ तहसील प्रशासन पर लोगों को गुमराह कर भवनों को ध्वस्त करने का आरोप लगाया। कहा कि प्रशासन ने गौरीकुंड के लोगों को सोनप्रयाग में वार्ता के लिए बुलाया और वार्ता के बहाने थाने में कई घंटे रोका गया, तो दूसरी तरफ प्रशासन व राजस्व पुलिस की टीम गौरीकुंड में निर्माणाधीन भवनों को ध्वस्त कर रही थी। प्रभावित पंकज गोस्वामी, सीपी गोस्वामी, दीर्घायु प्रसाद गोस्वामी, बीरेंद्र प्रसाद गोस्वामी, अमित गोस्वामी, मुकेश गोस्वामी आदि का कहना है कि चार माह से डीएम, एसडीएम व अन्य सक्षम अधिकारी गौरीकुंड से होकर पैदल रास्ते के केदारनाथ के कई चक्कर लगा चुके हैं, लेकिन एक बार कस्बे में हो रहे निर्माण कार्यों की जानकारी नहीं ली गई। स्वयं के प्रयास से आपदा में टूटे व जर्जर भवनों का पुनर्निर्माण किया जा रहा था और बिना नोटिस जारी किए निर्माणाधीन भवनों को ध्वस्त किया गया है।
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यात्रा विरोध की दी चेतावनी
गौरीकुंड ग्राम प्रधान राकेश गोस्वामी ने कहा कि आपदा के बाद से गौरीकुंड के लोगों के साथ उपेक्षापूर्ण रवैया अपनाया जा रहा है। उन्होंने और ग्रामीणों ने प्रशासन की कार्रवाई का विरोध करते हुए आगामी 29 अप्रैल से शुरू हो रही केदारनाथ यात्रा का गौरीकुंड से पूर्णरूप से संचालन बंद करने सहित गौरी माई मंदिर के कपाट नहीं खोलने की चेतावनी भी दी है।
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पटवारी 10 बार गौरीकुंड गया और उसने वहां के लोगों से सरकारी भूमि में निर्माण नहीं करने को कहा। तहसीलदार और केडीए के जेई ने भी कई बार लोगों को सूचित किया। यहां तक कि इन लोगों की ओर से लिखित में निर्माण न करने की बात कही गई है। बावजूद सरकारी भूमि पर अतिक्रमण किया गया, जिसे ध्वस्त किया गया है। - गोपाल सिंह चौहान, उप जिलाधिकारी ऊखीमठ।
गौरीकुंड में मंदाकिनी नदी किनारे रास्ते पर बन रहे भवन सरकारी भूमि में होने के साथ ही अति संवेदनशील क्षेत्र में थे। निर्माण के बाद ये भवन कभी भी किसी हादसे का कारण बन सकते थे। इसलिए नियमों के तहत इन्हें ध्वस्त किया गया है। - मंगेश घिल्डियाल, जिलाधिकारी रुद्रप्रयाग।