अगस्त्यमुनि। कुसुमगाड़-ओरिंग मोटर मार्ग के निर्माण की मांग को भूख हड़ताल पर बैठे अनशनकारियों व ग्रामवासियों के साथ प्रशासन और विभाग की पहले चरण की वार्ता बेनतीजा रही। उन्होंने मार्ग निर्माण शुरू होने पर ही आंदोलन खत्म करने की बात कही।
बुधवार को अपर जिलाधिकारी गिरीश गुणवंत और लोनिवि के ईई मनोज दास के नेतृत्व में एक टीम ओरिंग गांव पहुंची। अधिकारियों ने ग्रामीणों से भूख हड़ताल समाप्त करने को कहा। बताया कि 2 किमी कुसुमगाड़-ओरिंग मोटर मार्ग का प्रारंभिक सर्वे पूरा कर वित्तीय स्वीकृति के लिए डीपीआर शासन को भेजी जा चुकी है। इस संबंध में पत्राचार भी किया जा रहा है। जवाब मिलने पर आगे की कार्रवाई की जाएगी। एडीएम ने भी ग्रामीणों को मार्ग निर्माण से संबंधित पूरी प्रक्रिया के बारे में बताते हुए हरसंभव सहयोग का भरोसा दिया, लेकिन तीन घंटे की लंबी वार्ता के बाद भी ग्रामीण नहीं माने। कहा कि आपस में बैठक के बाद ही आंदोलन को लेकर कोई निर्णय लेंगे। इस मौके पर ग्राम प्रधान सुमित्रा नेगी का कहना था कि दो वर्ष पूर्व बमुश्किल मार्ग की स्वीकृति मिली, लेकिन अब विभाग निर्माण के नाम पर अलग-अलग बातें कर रहा है। बताया कि यातायात सुविधा के अभाव में जरूरतमंदों को समय पर उपचार नहीं मिल पा रहा है। सामाजिक कार्यकर्ता व पूर्व प्रधान वीरीभद्र सिंह ने कहा कि गांव के स्कूली बच्चों को 8वीं के बाद पढ़ाई के लिए 6 किमी पैदल जीआईसी भीरी की दौड़ लगानी पड़ रही है। उन्होंने शासन, प्रशासन पर क्षेत्र की उपेक्षा का आरोप लगाते हुए कहा कि जब तक सड़क का निर्माण कार्य शुरू नहीं होता, वे अपना आंदोलन समाप्त नहीं करेंगे। इस मौके पर ग्रामीणों ने एक सुर में कहा कि अगर, प्रशासन या विभाग द्वारा आंदोलनकारियों का उत्पीड़न कर आंदोलन को दबाने की कोशिश की गई तो, समस्त ग्रामीण भूख हड़ताल करेंगे। भूख हड़ताल पर बैठी मासंती देवी, दर्शनी देवी, सुमति देवी, नारायण सिंह नेगी व श्रीधर सिंह नेगी ने कहा कि जब तक गांव के लिए स्वीकृत सड़क निर्माण शुरू नहीं होता वे आंदोलनरत रहेंगे। वार्ता के दौरान तहसीलदार जयवीर राम बधाणी, लोनिवि के कनिष्ठ अभियंता, राजस्व उप निरीक्षक, ग्रामीण गजे सिंह, गीता देवी, पुष्पा देवी, रजपाल सिंह सहित महिला व युवक मंगल दल के पदाधिकारी, सदस्य व अन्य ग्रामीण थे।