रुड़की सिविल लाइंस स्थित एक दुकान पर सजे फूल।
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कोरोनाकाल में मुरझाए फूल विधानसभा चुनाव चरम पर पहुंचते ही दोबारा खिल उठे हैं। फूलों की मांग बढ़ने से फूल विक्रेता गदगद हैं। उनका कहना है कि प्रचार के जोर पकड़ने के साथ ही फूलों की मांग भी बढ़ी है। कोरोनाकाल में शहर में करीब ढाई क्विंटल फूल आ रहे थे, लेकिन अब रोजाना दस क्विंटल से अधिक फूलों की खपत हो रही है।
विधानसभा चुनाव इस समय पूरे चरम पर है। प्रत्याशी मैराथन प्रचार में जुटे हैं। आम जनता से लेकर समर्थक भी प्रत्याशियों को फूलों की माला पहना रहे हैं। गेंदे के फूल से बनी माला चुनाव में अधिक प्रयोग हो रही है। सोलानीपुरम निवासी फूल विक्रेता प्रवीण शर्मा का कहना है कि पिछले महीने तक स्थानीय गेंदे के फूल प्रतिदिन दो से ढाई क्विंटल तक बिक रहे थे। विधानसभा चुनाव शुरू होते ही मांग बढ़ गई है। प्रतिदिन आठ से दस क्विंटल फूल शहर में अलग-अलग जगहों पर बिक रहे हैं। चुनावी माहौल में फूलों की अच्छी कीमत मिल रही है। प्रत्याशियों के समर्थक किसी भी कीमत पर फूल-मालाएं खरीदने के लिए तैयार हैं। इससे फूल कारोबार को संजीवनी मिली है। संवाद
20 से 25 रुपये में बिक रही गेंदे के फूल की माला
सामान्य दिनों में गेंदे के फूलों की माला की कीमत दस से 15 रुपये थी। चुनाव शुरू होते ही यह माला 20 से 25 रुपये में बिकने लगी है। खुदरा में गेंदा का फूल 120 रुपये प्रति किलो बिक रहा है। थोक में दस हजार रुपये क्विंटल का भाव है। फूल विक्रेताओं का कहना है कि जब मांग कम थी तो उन्हें फूल-माला की बिक्री के लिए शहर में घूमना पड़ता था। अब चुनाव में प्रत्याशी और उनके समर्थक दुकानों पर पहुंच रहे हैं।
श्रद्धालुओं में भी बढ़ी फूलों की मांग
फूल विक्रेताओं का कहना है कि कोरोनाकाल में मंदिरों में भी श्रद्धालु कम ही फूल चढ़ा रहे थे। ऐसे में फूलों की मांग और कम हो गई थी, लेकिन अब कोरोना का साया धीरे-धीरे खत्म हो रहा है तो फूलों की मांग बढ़ी है। श्रद्धालु मंदिरों में गुलाब और गेंदे के फूल अधिक चढ़ा रहे हैं।
इन फूलों की भी बढ़ी मांग
गेंदा : 120 रुपये किलो
गुलाब लाल : 40 रुपये पीस
सफेद रोज : 60 रुपये पीस
पीला, पिंक रोज : 60 रुपये पीस
आर्किड फूल : 60 रुपये पीस
नीला गुलाब : 100 रुपये पीस