रुड़की। कुछ ही दिनों में नगर निगम शहर से तहबाजारी प्रथा समाप्त करने जा रहा है। पूरे शहर को सात जोन में बांटकर रेहड़ी-ठेलीवालों के लिए निश्चित स्थान तय किए जाएंगे। साथ ही इनकी पहचान के लिए आईकार्ड भी मुहैया कराए जाएंगे।
गली मोहल्लों, नुक्कड़ और चौराहे पर दिखाई देने वाली ठेलियां अब बीते जमाने की बात हो जाएगी। पूरे शहर की ठेलियां अब चुनिंदा स्थानों पर दिखाई देंगी। सहायक नगर निगम अधिकारी उत्तम सिंह नेगी ने बताया कि अभी तक शहर में करीब 600 रेहड़ी-ठेली वाले हैं। तहबाजारी के रूप में प्रत्येक रेहड़ी-ठेलीवाले से पांच रुपये वसूले जाते हैं। लेकिन अब तहबाजारी समाप्त होने जा रही है। नगर निगम अब वेंडिंग पॉलिसी (रेहड़ी-ठेली व्यवसाय) शुरू करने के लिए नियम बनाने जा रही है। पूरे शहर को सात जोन में विभाजित किया गया है। इन जोन पर खड़े होकर कोई भी ठेली वाला अपना व्यापार कर सकेगा। इसका सर्वे करने के लिए एजेंसियों से टेंडर मांगे गए थे।
29 जुलाई को नगर निगम में चार एजेंसियों ने टेंडर डाले हैं। टेंडर एक अगस्त को खोले जाने थे। लेकिन अभी औपचारिकताएं पूरी नहीं हो पाई है। जिसके चलते एजेंसी के नाम का खुलासा नहीं हो पाया है। चारों एजेंसी बाहर के राज्यों से ताल्लुक रखती है। प्रदेश से एक भी एजेंसी ने टेंडर प्रक्रिया में हिस्सा नहीं लिया है। सर्वे में छह माह का समय लग सकता है। उसके बाद ठेली-रेहड़ी वालों के पंजीकरण शुरू किए जाएंगे। पंजीकृत रेहड़ी ठेली व्यापारी को नगर निगम आईकार्ड मुहैया कराएगा।
प्रदेश में कई जगह शुरू हुई व्यवस्था
सहायक नगर निगम अधिकारी उत्तम सिंह नेेगी ने बताया कि शहर में ठेली और रेहड़ी वालों से कई बार यातायात व्यवस्था बहुत गड़बड़ा जाती है। लेेकिन वेंडिंग जोन बनने से निश्चित स्थानों पर रेहड़ी ठेली वाले अपना व्यापार कर सकेंगे। इससे उनकी पहचान निश्चित करने में भी सहायता मिलेगी।