रुड़की। अब निर्भया के दोषियों को फांसी देने में देरी क्यों ? जघन्य अपराध करने वालों के खिलाफ फांसी में देरी पर महिलाओं ने अमर उजाला संवाद कार्यक्रम में यह सवाल उठाया। उन्होंने इस तरह के मामलों में त्वरित न्याय व्यवस्था की वकालत की। ज्यादातर महिलाओं ने समय के साथ बढ़ते अपराधों के दृष्टिकोण से न्यायिक व्यवस्था में बदलाव की मांग की।
नगर निगम के कांफ्रेंस हॉल में बृहस्पतिवार को अमर उजाला संवाद कार्यक्रम के तहत ‘निर्भया’ केस में लगातार टल रही फांसी को लेकर महिलाओं ने बेबाकी से अपनी बात रखी। वक्ताओं का कहना था कि जहां हमें एक ओर अपने संविधान का सम्मान करना चाहिए। दूसरी ओर जघन्य अपराधों में कानूनी लचीलेपन को खत्म करने के लिए आवाज उठानी होगी। ताकि समय के साथ बढ़ रहे इस तरह के अपराधों पर ब्रेक लगाया जा सके और पीड़ितों को त्वरित न्याय मिल सके। वक्ताओं ने कहा कि जब संविधान बना था, तब जनसंख्या और अपराध कम था, अब इसे बदलने की जरूरत है। इसके साथ ही वक्ताओं ने सेक्स एजूकेशन, बालिकाओं को विरोध करने की शिक्षा दिए जाने, रेप के सभी मामलों को फास्ट ट्रैक के अंतर्गत लाने आदि के भी सुझाव दिए। महिलाओं की सुरक्षा के लिए जागरुकता का संचार करने की आवश्यकता पर भी जोर दिया गया। संवाद के दौरान वक्ताओं ने रेप जैसी घटनाओं में प्रशिक्षण प्राप्त विशेष ज्यूडिशियरी व्यवस्था अमल में लाने पर भी जोर दिया गया। निर्भया मामले पर पीड़ा व्यक्त करते हुए वक्ताओं ने कहा कि अवेयरनेस नहीं बल्कि लॉ एंड ऑर्डर से ही न्याय मिल सकता है।
बिना कड़ी और त्वरित सजा के प्रावधान के अनुशासित विहीन समाज खतरनाक है। जघन्य अपराधों में अपील करने की लिमिट तय होनी चाहिए। परिवर्तन शाश्वत नियम है, इसलिए कानून में भी परिवर्तन जरूरी है।
- डॉ. वारिजा, महिला रोग विशेषज्ञ एवं सदस्य रोटरी क्लब
स्वस्थ यौन शिक्षा केवल स्कूलों में ही नहीं बल्कि घर में भी दी जानी चाहिए। बेटियों को बुराई और गलत का विरोध करने के प्रति प्रेरित करना होगा। रेप जैसे मामलों में दोषियों को तत्काल सजा देनी होगी।
- नीरज सिंह, जिला महिला प्रमुख स्वदेशी जागरण मंच
जघन्य अपराधों में सख्त सजा का प्रावधान होना चाहिए ताकि इस तरह की घटना दोबारा न हो। हैदराबाद जैसा न्याय हो तो अपराधी, अपराध करने से डरेगा और एक सभ्य समाज का निर्माण होगा।
- सुजाता आहूजा, डिस्ट्रिक्ट एडीटर इनर व्हील क्लब
रेप व मर्डर जैसे जघन्य अपराधों में एक माह में सजा मिले। कानून में बदलाव हो। जब संविधान बना था, तब जनसंख्या और अपराध कम था, अब समय की मांग के अनुरूप ही कानूनों में संशोधन होना चाहिए।
- डॉ. अमिता श्रीवास्तव, प्रिंसिपल मैथोडिस्ट गर्ल्स पीजी कॉलेज
जघन्य अपराधों में त्वरित न्याय से इनकार नहीं किया जा सकता, लेकिन हमें अपने संविधान का सम्मान और उसमें विश्वास भी कायम रखना होगा। कानून में बदलाव के साथ हमें जागरूक भी होना होगा।
- साक्षी त्यागी, अधिवक्ता एवं अध्यक्ष एलायंस संस्कृति
जिन मामलों में पहले ही दिन अपराधी चिह्नित हो गए हों, उन मामलों में दोषियों को सजा देने के लिए आठ साल लग जाते हैं, जो कानून व्यवस्था की प्रणाली पर सवालिया निशान है। ऐसे सभी मामले फास्ट ट्रैक के दायरे में लाया जाना चाहिए।
-- सीमा पांडेय, असिस्टेंट प्रोफेसर मैथोडिस्ट गर्ल्स पीजी कॉलेज
अपराधियों को मौके पर ही सजा दी जाए। न्याय में जितनी देरी होती है, अपराध उतना ही बढ़ता है। अपराध का दंश झेल रहे पीड़ित सालों साल न्याय के दरवाजे पर एड़ियां रगड़ते हैं, तब भी उन्हें पूरा न्याय नहीं मिलता।
- ज्योति वत्स, असिस्टेंट प्रोफेसर मैथोडिस्ट गर्ल्स पीजी कॉलेज
सरकारी सिस्टम में भ्रष्टाचार भी न्याय व्यवस्था में देरी के लिए दोषी है। केस दर्ज होने से लेकर तफ्तीश तक पीड़ितों को कई दौर से गुजरना पड़ता है। पीड़ितों को न्याय मिलने से सरकार उन्हें विशेष सुविधाएं दे।
- डॉ. अनुपमा वर्मा, असिस्टेंट प्रोफेसर एवं कार्यक्रम अधिकारी एनएसएस
जिन अपराधियों के चेहरे घटना के वक्त उजागर हो जाते हैं, उन्हें तत्काल मौत के घाट उतार देना चाहिए। जिनमें संशय हो, उन पर त्वरित जांच के बाद कार्रवाई होनी चाहिए। तभी हम अपने देश की बेटियों को सुरक्षा प्रदान कर सकते हैं।
- रक्षा वालिया, अध्यक्ष नारी उज्ज्वल जीवन ट्रस्ट
निर्भया कांड भारतीय सभ्यता के मुंह पर तमाचा है। अंतरराष्ट्रीय मीडिया में भी चर्चाओं में रहा। इससे देश की छवि को धक्का लगा। अब इस तरह की घटनाओं पर रोक लगाने को त्वरित न्याय व्यवस्था लागू करने की जरूरत है।
- डॉ. राजकुमार उपाध्याय, प्रदेश सचिव, संस्कार भारती
बेटियों के साथ हो रहे अन्याय के बाद न्याय में देरी उससे भी बड़ा अन्याय है। कानून व्यवस्था में पीड़ितों को अदालत के चक्कर काटने पड़ रहे हैं। इसके बाद भी न्याय नहीं मिल रहा है।
- पुष्पा रानी, समाजसेवी एवं सचिव, नारी उज्ज्वल जीवन ट्रस्ट
इन्होंने भी रखे विचार -
- मोहम्मद सलीम, सुदेश अग्रवाल, सुरेश गोस्वामी, मनीषा, रीतू, पार्वती, यश्वनी वालिया, गौतम, सोफिया, पुष्पा रानी, सीता बधानी