वक्फ बोर्ड गठन की कवायद शुरू होते सियासी हलचल तेज हो गई है। सत्ताधारी दल के विधायक और पदाधिकारियों ने अपने समर्थकों को बोर्ड में शामिल कराने के दांवपेंच शुरू कर दिए हैं। मालूम हो कि बोर्ड के 11 सदस्यों में से 10 को सरकार की ओर मनोनीत किया जाएगा। जबकि एक सदस्य का चयन मुतवल्ली करेंगे। इसके लिए पांच अक्तूबर को चुनाव की तिथि तय की गई है।
उत्तराखंड में वक्फ बोर्ड की अरबों की संपत्ति की देखरेख की जिम्मेदारी बोर्ड पर है, लेकिन 22 जून 2015 को बोर्ड भंग होने के बाद से फिलहाल प्रशासन इसकी देखरेख कर रहा है। इससे पहले बीजेपी सरकार में वक्फ बोर्ड के चेयरमैन रहे राव शराफत को कांग्रेस सरकार ने अनियमितता के आरोप में हटा दिया था। इसके बाद राव काले खां को चेयरमैन बनाया गया था, जिनका कार्यकाल जून 2015 में पूरा होने के बाद से बोर्ड भंग है। अब फिर से बोर्ड के गठन को लेकर कवायद शुरू की गई है। कांग्रेस सरकार विधानसभा चुनाव की अधिसूचना से पहले इसके गठन की तैयारी कर चुकी है।
ऐसे में कांग्रेसी नेताओं में भी अपने समर्थकों को वक्फ बोर्ड में शामिल कराने की होड़ लगी है। इससे पहले पांच अक्तूबर को पूरे प्रदेश के 36 मुतव्वलियों में से एक को मेंबर चुना जाएगा। इसके अलावा वक्फ बोर्ड के अन्य 10 सदस्यों का मनोनयन होना है। इसमें दो महिला सदस्यों के साथ ही दो एमएलए, एक मौलवी, एक वकील, एक समाज सेवी, एक ज्वाइंट सेकेट्री सहित अन्य मेंबर शामिल होंगे। इस संबंध में वक्फ बोर्ड के सीईओ अहमद अली का कहना है कि पांच अक्तूबर को मुतवल्लियों के चुनाव की तिथि निर्धारित है। इसके बाद अन्य सदस्यों का मनोनयन शासन और सरकार को करना है।