रुड़की। उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड के एक बड़े भू-भाग की सिंचाई गंगनहर से की जाती है। वर्ष 2013 में उत्तर प्रदेश सरकार ने गंगनहर से होने वाली सिंचाई का शुल्क माफ कर दिया था। लेकिन उत्तराखंड के छह हजार किसानों से आज भी सिंचाई शुल्क लिया जा रहा है। हरिद्वार जिले के करीब 10 हजार हेक्टेयर क्षेत्रफल में हो रही सिंचाई के एवज में किसानों से सालाना करीब 28 लाख रुपये शुल्क वसूला जा रहा है।
रुड़की शहर के बीचोंबीच से गुजर रही गंगनहर से यहां के हजारों किसानों की रोजी रोजी चलती है। वेस्ट यूपी के किसानों की खेतीबाड़ी भी पूरी तरह इसी पर निर्भर है। इसे देखते हुए वर्ष-2013 में यूपी सरकार ने किसानों का सिंचाई शुल्क माफ कर दिया था। इससे उत्तर प्रदेश के किसानों को बड़ी राहत मिली। लेकिन उत्तराखंड के किसानों को आज भी सिंचाई शुल्क देना पड़ रहा है। क्षेत्रीय किसानों का कहना है जब गंगनहर का संचालन उत्तर प्रदेश सिंचाई विभाग की ओर से किया जा रहा है और उसने शुल्क भी माफ कर दिया है तो उत्तराखंड के किसानों से क्यों इसकी वसूली की जा रही है। नारसन और रुड़की ब्लाक में ही करीब छह हजार किसानों की खेतीबाड़ी गंगनहर के भरोसे हैं।
श्ाुल्कक बढ़ाने का चल रहा प्रस्ताव
यूपी सरकार की ओर से सिंचाई शुल्क माफ करने के बावजूद उत्तराखंड सरकार की ओर से न सिर्फ गंगनहर का सिंचाई शुल्क वसूला जा रहा है, बल्कि इसे बढ़ाने का भी प्रस्ताव है, लेकिन इस पर फिलहाल शासन ने रोक लगाई है।
किस फसल का कितना शुल्क
फसल शुल्क
गन्ना 474 रुपये
धान व गेहूं 287 रुपये
बरसीम चारा 99 रुपये
आलू 356 रुपये
तंबाकू 306 रुपये
सब्जियां 287 रुपये
कपास 114 रुपये
(नोट : उक्त शुल्क प्रति हेक्टेयर के हिसाब से।)
इनका कहना है
गंगनहर से सिंचाई शुल्क वसूलने का मामला शासन स्तर का है। इस पर शासन स्तर से ही निर्णय लिया जाना है। फिलहाल शुल्क बढ़ाने के प्रस्ताव पर रोक लगा दी गई है।
मंगेश घिल्ड़ियाल ज्वाइंट मजिस्ट्रेट
क्षेत्र के अधिकांश भू-भाग की सिंचाई नहर और रजवाहे पर आधारित है। इसके बावजूद उत्तराखंड सरकार की ओर से किसानों का सिंचाई शुल्क माफ नहीं किया जा रहा है। इसके विरोध में जल्द आंदोलन शुरू किया जाएगा।
-रवि चौधरी, भाकियू जिलाध्यक्ष
शासन को सिंचाई शुल्क माफ करने के संबंध में पत्र लिखा गया है। अगर जल्द इस पर निर्णय नहीं लिया गया तो आंदोलन किया जाएगा। साथ ही वसूली करने वाले कर्मियों को बंधक बनाया जाएगा।
-राकेश लोहान, प्रवक्ता किसान मजदूर रक्षा दल
उत्तराखंड सरकार किसानों के साथ ज्यादती कर रही है। यूपी सरकार की तरह उत्तराखंड सरकार को किसानों का सिंचाई शुल्क माफ कर देना चाहिए, नहीं तो किसान संगठन आंदोलन करने को मजबूर होंगे।
-महकार सिंह, अध्यक्ष किसान मोरचा