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चाचा-भतीजा नदी में फंसे, रेक्स्यू कर निकाला

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मोहंडरो नदी में अचानक अधिक पानी आने से चाचा-भतीजा फंस गए। आसपास के लोगों ने सूचना पुलिस को दी। पुलिस और बाढ़ चौकी टीम ने मौके पर पहुंचकर दो घंटे की मशक्कत के बाद उन्हें सुरक्षित बाहर निकाल लिया। वहीं सोलानी नदी पार सब्जियां तोड़ने गए आठ लोग नदी में अचानक तेज पानी आने से फंस गए। पुलिस ने रस्से और ट्यूब की मदद से सभी को सुरक्षित बाहर निकाल लिया।
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शनिवार सुबह तेलपुरा निवसी आबिद (30) अपने चार साल के भतीजे सलमान को लेकर भैंसा-बुग्गी से खेत में चारा लेने गए थे। करीब नौ बजे वे मोहंडरो नदी के रास्ते चारा लेकर आ रहे थे। इस बीच नदी में तेज रफ्तार से अधिक पानी आ गया। पानी बढ़ता देख आबिद ने भैंसा-बुग्गी को नदी में ही छोड़ दिया और अपने भतीजे को लेकर एक टापू पर चले गए। इस बीच भैंसा भी बुग्गी से अलग हो गया और किनारे आ गया। बुग्गी नदी में बह गई।
वहीं, टापू, नदी का जलस्तर बढ़ता देख दहशत में चाचा-भतीजे ने शोर मचा दिया। शोर सुनकर आसपास के खेतों में काम कर रहे लोग नदी किनारे पहुंच गए। उन्होंने इसकी जानकारी पुलिस को दी। सूचना पाकर बुग्गावाला पुलिस और बाढ़ चौकी प्रभारी बुग्गावाला आशु गिरी, बाढ़ चौकी प्रभारी तेलपुरा रविकांत मौके पर पहुंचे। पुलिस और बाढ़ चौकी टीम ने बचाव कार्य शुरू किया। करीब दो घंटे की कड़ी मशक्कत के बाद दोनों को सकुशल बाहर निकाल लिया गया।
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वहीं सोलानी नदी में अचानक आए पानी से आठ लोग फंस गए। प्रभारी निरीक्षक अमरजीत सिंह ने बताया कि वो लोेग नदी पार सब्जियां तोड़ने गए थे। बॉबी, बबलू, सन्नी, मुकर्रम, ओमपाल, प्रमोद, अहसान, रेनू निवासी लामग्रंट को सुरक्षित नदी से बाहर निकाला गया है। ट्रैक्टर-ट्रॉली दूसरे छोर पर ही फंसी है।
शिवालिक की पहाड़ियों में मूसलाधार बारिश के बाद बुग्गावाला क्षेत्र में नदी-नाले उफान पर आ गए। एक नाले में पानी की बहाव इतना तेज था कि पानी पुलिया से नहीं निकलने के चलते सड़क पर बहने लगा। इससे बिहारीगढ़-रोशनाबाद मार्ग पर बसे करीब 40 गांवों की आवाजाही दो घंटे बंद रही।
शुक्रवार रात और शनिवार सुबह से देहरादून व शिवालिक की पहाड़ियों में लगातार मूसलाधार बारिश हो रही है। इस बारिश से बिहारीगढ़ क्षेत्र की नदियां और नाले उफान पर आ गए। शनिवार सुबह करीब 10 बजे बुग्गावाला-बिहारीगढ़-रोशनाबाद मार्ग पर तेलपुरा के पास खेतों के रास्ते गुजर रहे एक नाले में बरसाती पानी आ गया। कुछ ही देर में नाला उफान पर आ गया।
पानी का बहाव इतना तेज था कि रास्ते पर बनी पुलिया में पानी नहीं समा सका और पानी सड़क पर करीब दो फीट ऊपर तक बहने लगा। ऐसे में यहां से गुजरने वाले राहगीर डर गए और दोनों ओर सड़क पर खड़े होकर पानी कम होने का इंतजार करने लगे। इस मार्ग से बुग्गावाला, तेेलपुरा, बुडकावाला, बंदरजूड़, ग्रंट, घेरपेम्मा, बादीवाला, हजाराग्रंट, बोकलवाला, बनवाला, बंजारेवाला समेत करीब 40 गांवों के लोगों का आना-जाना है। नाला उफान पर आने के कारण इन गांवों की आवाजाही करीब दो घंटे बंद रही। स्थानीय लोगों के अनुसार उन्होंने अब से पहले इस नाले में इतना पानी आते नहीं देखा है। उन्होंने बताया कि यह मार्ग रातभर चलता है, ऐसे में बरसात में अब लोग रात में इस मार्ग से चलते हुए डरेंगे। हालांकि करीब दो घंटे बाद पानी धीरे-धीरे कम होना शुरू हो गया। इसके बाद लोगों ने आवाजाही शुरू की।
लगातार हो रही बारिश से गंगा का जलस्तर बढ़ रहा है। शनिवार को गंगा नदी का जलस्तर 291.90 मीटर दर्ज किया गया। जबकि गंगा का चेतावनी निशान 293 मीटर और खतरे का निशान 294 मीटर है। गंगा का जलस्तर बढ़ने के साथ ही नदी किनारे बसे ग्रामीणों की धड़कने बढ़ने लगी है। प्रशासन ने गांव में मुनादी कराकर और फोन के माध्यम से ग्रामीणों को गंगा की ओर न जाने की चेतावनी दी है। क्षेत्रीय ग्रामीण रविपाल, मुकेश कुमार, अरुण पंवार, आदेश कुमार आदि ग्रामीणों का कहना है कि पांच साल से गंगा नदी किनारे बालावाली से लेकर उत्तर प्रदेश के रामसहायवाला तक बना तटबंध तीन जगह से टूटा पड़ा है। गंगा का जलस्तर बढ़ने से टूटे तटबंध से बाढ़ का पानी खानपुर और लक्सर क्षेत्र की कृषि में भूमि पर तबाही मचा सकता है। संवाद
क्षेत्र में कई दिनों के इंतजार के बाद बारिश होने से किसानों के चेहरे खिल गए हैं। झबरेड़ा, इकबालपुर व लखनौता क्षेत्र में एक सप्ताह से बारिश नहीं हो रही थी। इसको लेकर धान उत्पादक चिंतित थे। वहीं गन्ने के खेत भी सूखने लगे थे। किसानों ने पहली बारिश पर गन्ने के खेतों में कीटनाशक व उर्वरक डाल रखे थे। इसके बाद फसल में पानी की जरूरत पड़ रही थीं। शनिवार को हुई बारिश से धान, गन्ना व अन्य फसलों की सिंचाई हो गई। किसान राजपाल सिंह, बिजेंद्र कुमार व प्रदीप आदि ने इस बारिश को बहुत ही लाभदायक बताया है। वहीं सहायक कृषि विकास अधिकारी राजबीर सिंह ने बताया है कि यह बारिश किसानों की फसलों के लिए वरदान से कम नहीं है।
क्षेत्र के ग्राम रुहालकी दयालपुर, सिसौना, मक्खनपुर, रायपुर, मानकमजरा, हाल्लुमजरा, गी शहीदपुर, चौली शाहबुद्दीनपुर, मंडावर, करौंदी, धीरमजरा आदि गांवों में शनिवार को एक से तीन बजे तक बारिश होने से खेत लबालब हो गए। किसान सतीश कुमार, सुरेश कुमार, महेंद्र, ओमकार, राजेंद्र सिंह, प्रमोद कुमार आदि का कहना है कि काफी समय से बारिश नहीं होने से किसानों को फसलों में पानी देने के लिए ट्यूबवेल चलाने पड़ रहे थे। शनिवार को बारिश होने से किसानों की बड़ी राहत मिली है। संवाद
क्षेत्र में लंबे समय से बारिश नहीं होने से लोगों को उमस भरी गर्मी से परेशान होना पड़ रहा था। हर रोज सुबह आसमान में बादल छाते और बिना बरसे ही निकल जाते। लोग भी उम्मीदभरी नजरों से आसमान की ओर टकटकी लगाकर बारिश का इंतजार कर रहे थे। शनिवार सुबह एक बार फिर आसमान में बादल छा गए। कुछ देर झमाझम बारिश होने के बाद रुक गई लेकिन आसमान में बादल छाए रहे। इससे मौसम सुहावना हो गया।
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