रुड़की/नारसन/सुल्तानपुर। शहर से देहात तक बुखार और डेंगू का कहर थमने का नाम नहीं ले रहा है। सोमवार को बुखार से दो और मौत हो गई। इसमें एक पांच माह की बच्ची शामिल है। दूसरी ओर सिविल अस्पताल में सोमवार को डेंगू के दस से अधिक मामले सामने आए हैं। निजी अस्पतालों में भी मरीजों का तांता लगा हुआ है। कहीं किसी अस्पताल में बैड नहीं मिल रहा है।
मच्छी मोहल्ला निवासी पांच माह की बच्ची जैद पुत्री इरशाद को रविवार देर रात अचानक बुखार आ गया था। रातभर परिजन बच्ची के सिर पर पानी की पट्टी बांधकर बुखार कम करने का प्रयास करते रहे। सुबह होते ही परिजन बच्ची को लेकर निजी अस्पताल लेकर पहुंच गए। लेकिन जब तक वह अस्पताल पहुंचते बच्ची ने दम तोड़ दिया। गौरतलब है कि मच्छी मोहल्ला में दो लोगों की बुखार से पहले भी मौत हो चुकी है। इसमें एक शकीरा (16) और दूसरी मुन्नी (65) शामिल हैं। लगातार क्षेत्र में बुखार से तीसरी मौत से क्षेत्रवासियों में प्रशासन के खिलाफ आक्रोश है। आरोप लगाया कि मोहल्ले में साफ-सफाई व्यवस्था पटरी से उतरी हुई है। लेकिन इस तरफ कोई ध्यान नहीं दे रहा है। स्वास्थ्य विभाग दो की मौत के बाद मोहल्ले में झांकने तक नहीं आए हैं।
नारसन क्षेत्र के टिकौला निवासी सोनू (पुत्र नवल) को भी तीन-चार दिन से लगातार बुखार आ रहा था। स्थानीय डाक्टरों से उपचार करवाने पर जब आराम नहीं मिला तो परिजन सोनू को लेकर रुड़की के एक निजी डाक्टर के पास लेकर पहुंचे और भर्ती कराया। यहां उपचार के दौरान उसकी मौत हो गई। इसके अलावा सुल्तानपुर निवासी जाहिद (30) और तहरीन (18) में डेंगू की पुष्टि हुई है। सिविल अस्पताल रुड़की में सोमवार को डेंगू के दस मामले पाजिटिव आए हैं।
अस्पताल के कार्यवाहक सीएमएस डा. संजय कंसल ने बताया कि बुखार से पीड़ित लगभग 30 मरीजों के ब्लड सैंपल लिए गए थे। इनमें इसमें से 10 लोगों में प्रथम दृष्टया डेंगू की पुष्टि हुई है। अब एलाइजा जांच के लिए सैंपल हरिद्वार भेजे जाएंगे। निजी अस्पतालों में भी डेंगू और वायरल के मरीजों की भरमार है। स्थिति यह है कि बुखार के मरीजों को भरती करने के लिए किसी भी अस्पताल में बेड तक नहीं मिल रहे हैं।