आचार संहिता से पहले आनन-फानन में स्थानांतरण के ऑर्डर कराने वाले अधिकारी अब ज्वाइनिंग के लिए दफ्तरों के चक्कर काट रहे हैं। यही नहीं मलाईदार पदों पर शासन के अधिकारियों से भी ज्वाइनिंग कराने के लिए स्थानीय अधिकारियों पर दबाव बनवा रहे हैं। लेकिन हाल ही में आचार संहिता के बाद नियुक्ति प्रक्रिया को लेकर शिक्षा विभाग के अधिकारी के खिलाफ हुई निलंबन की कार्रवाई के बाद अब अन्य विभागों के स्थानीय अधिकारियों को एक ओर चुनाव आयोग की कार्रवाई का डर है तो दूसरी ओर शासन के अधिकारियों की नाराजगी भी भारी पड़ रही है।
गौरतलब है कि आचार संहिता से पहले विभिन्न विभागों में बंपर तबादले हुए हैं। इनमें से ज्यादातर तबादले सिफारिशी बताए जा रहे हैं। सूत्रों के अनुसार रुड़की में कई मलाईदार पदों पर बैठने के लिए मोटी रकम भी खर्च की गई है। वहीं दूसरी ओर आचार संहिता से पहले शिक्षा विभाग में बड़ी संख्या में तबादले हुए थे। हाल ही में शासन की ओर से इन सभी तबादलों पर रोक लगा दी गई है लेकिन अन्य विभागों में हाल फिलहाल में तबादलों का ऑर्डर पाने वाले अधिकारी ज्वाइनिंग के लिए दफ्तरों के चक्कर काट रहे हैं। ऊर्जा निगम में ही ऐसे कई मामले हैं। एक अधिकारी ने बताया कि जब से शिक्षा विभाग के अधिकारियों के खिलाफ जिलाधिकारी की संस्तुति पर शासन ने कार्रवाई की है तब से कोई भी अधिकारी इस तरह का जोखिम उठाने के लिए तैयार नहीं है।