रुड़की-देवबंद रेल लाइन पर 2021 के कुंभ से पहले ट्रेन दौड़ेगी। रेलवे विभाग ने लक्ष्य तय कर उत्तराखंड और उत्तरप्रदेश के हिस्सों में काम शुरू कर दिया है। अधिकारियों के मुताबिक उत्तरप्रदेश में भूमि अधिग्रहण का मामला सुलझ गया है, जबकि उत्तराखंड में कुछ अवरोध है। इसे भी दूर कर लिया जाएगा। दो माह पूर्व यूपी और उत्तराखंड में बंद पड़े रेल लाइन निर्माण कार्य को फिर से शुरू किया गया है।
रुड़की देवबंद के बीच उम्मीदों की रेल फिर चलनी शुरू हो गई है। परियोजना से जुड़े अधिकारियों की मानें तो 28 किलोमीटर लंबी रेल लाइन के लिए यूपी के हिस्से में प्रशासनिक स्तर पर भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया को पूरा कर लिया गया है। वहीं उत्तराखंड में भी किसानों को धरना स्थल से उठाकर काम शुरू करा दिया गया है। 691 करोड़ की परियोजना के तहत लाइन का 11 किलोमीटर हिस्सा उत्तराखंड में है, जबकि 17 किलोमीटर का हिस्सा उत्तर प्रदेश में है। इस रेल लाइन का निर्माण होने से रुड़की और दिल्ली के बीच दूरी 32 किलोमीटर कम हो जाएगी। करीब सात सौ करोड़ रुपये की इस परियोजना में 51 हेक्टेयर भूमि का हिस्सा शामिल किया गया है। बताया गया है कि इस रेल बाईपास में 71 पुलिया और चार बड़े पुलों का निर्माण पूरा कर लिया गया है। परियोजना के वरिष्ठ अधिशासी इंजीनियर विनोद तलवार ने बताया कि सहारनपुर के डीएम व उत्तराखंड के डीएम के सहयोग से रेलवे लाइन को बिछाने का काम चल रहा है।
उत्तराखंड के इन गांवों से गुजरेगी ट्रेन
- साल्हापुर, भिस्तीपुर, रहीमपुर, पनियाला, चंदापुर, लाठादेवा शेख, पानियाली, पनियाला, झबरेड़ी, झबरेड़ा और शीतलपुर।
अक्तूबर, 2018 तक पूरा होना था काम
रेलवे लाइन बिछाने का काम अक्तूबर, 2018 तक पूरा होना था, लेकिन यूपी और उत्तराखंड में भूमि अधिग्रहण के चलते काम अटकता रहा। करीब एक साल से उत्तराखंड के झबरेड़ा क्षेत्र के भिस्तीपुर में अधिक मुआवजे की मांग को लेकर किसान धरने पर बैठे थे, जिन्हें हाल ही में धरना स्थल से उठाकर काम शुरू कराया गया है। अब 2021 के फरवरी माह तक इस परियोजना के पूरी होने के दावा किया जा रहा है।
2021 कुंभ से पहले यह परियोजना पूरी कर ली जाएगी। उत्तरप्रदेश और उत्तराखंड में रुका पड़ा रेल लाइन निर्माण का काम शुरू हो गया है। उत्तराखंड में कुछ जगहों पर भूमि संबंधी अवरोध है। उसे भी जल्द ही दूर कर लिया जाएगा। प्रत्येक तीन माह में पीएमओ द्वारा प्रगति रिपोर्ट मांगी जाती है, जिसको बना कर भेजा जा रहा है।
-विनोद तलवार, वरिष्ठ अधिशासी इंजीनियर, निर्माण खंड उत्तर रेलवे रुड़की