बेलडा गांव में मनरेगा के तहत हुए सिंचाई पाइप लाइन के कार्यों में मस्ट्रोल में अधिक मजदूर दर्शाकर रुपये निकालने के आरोप में बीडीओ/मनरेगा लोकपाल ने ग्राम रोजगार सेवक के निलंबन की संस्तुति की है। इसके अलावा तीन अधिकारियों और प्रधान पर एक-एक हजार रुपये का जुर्माना लगाया गया है। साथ ही तत्कालीन ग्राम विकास अधिकारी और तत्कालीन मनरेगा के कनिष्ठ अभियंता पर विभागीय कार्रवाई की संस्तुति भी की है।
तीन फरवरी को शिवदासपुर उर्फ तेलीवाला निवासी आकाश कुमार सैनी ने ग्रामीण विकास मंत्रालय में शिकायत की थी। उन्होंने बेलडा गांव में वर्ष 2017-18 और 2018-19 में हुए सिंचाई के लिए पीवीसी पाइप लाइन डालने के काम में धांधली का आरोप लगाया था। बीडीओ/मनरेगा लोकपाल शिव प्रसाद थपलियाल ने अन्य अधिकारियों के साथ गांव में पहुंचकर विकास कार्यों की जांच की। इस दौरान इन दो वर्षों में हुए पाइप लाइन के सभी कार्य तो सही पाए गए, लेकिन पत्रावलियों में अनियमितताएं सामने आईं। कार्यों में अलग-अलग मदों पर हुए खर्च को एक साथ दिखाया गया। वहीं मजदूरों को केवल 12376 का भुगतान किया जाना था, जबकि मस्ट्रोल में अधिक मजदूर दिखाकर करीब 38 हजार रुपये निकाल लिए गए।
मस्ट्रोल पर ग्राम प्रधान सचिन कुमार, तत्कालीन वीडीओ राजीव कुमार, रोजगार सेवक सुशील कुमार और तत्कालीन कनिष्ठ अभियंता रविन्द्र कुमार के हस्ताक्षर मिले। जबकि लेखाकार मुनेश चौहान ने भुगतान से पहले पत्रावली और माप पुस्तिका का ठीक से मिलान नहीं किया। जांच में स्पष्ट किया गया है कि संबंधित सभी कार्मिकों ने जानबूझकर सरकारी राशि को खुद-बुर्द करने का प्रयास किया है। ऐसे में लोकपाल ने ग्राम रोजगार सेवक सुशील कुमार को अधिक मजदूरी निकालने के आरोप में निलंबित करने और तत्कालीन वीडीओ और तत्कालीन कनिष्ठ अभियंता पर विभागीय कार्रवाई की संस्तुति की है। इसके अलावा लेखाकार, निवर्तमान ग्राम प्रधान, वीडीओ और कनिष्ठ अभियंता पर लापरवाही बरतने पर एक-एक हजार रुपये का जुर्माना लगाया है।
...तो एक पर ही क्यों हुई निलंबन की संस्तुति
मस्ट्रोल भले ही निजी तौर पर रखे गए ग्राम रोजगार सेवक ने बनाया हो, लेकिन सवाल यह है कि इसे चार अधिकारियों ने बिना जांच-पड़ताल के कैसे पास कर दिया। यहां ग्राम रोजगार सेवक के भरोसे ही फाइलों पर साइन हो रहे हैं तो अभी तक के सभी कार्यों की जांच जरूरी है। मामले में जितनी जिम्मेदारी ग्राम रोजगार सेवक की है, सरकारी अधिकारी होने के नाते उससे ज्यादा जिम्मेदारी अन्य अधिकारियों की भी थी। ऐसे में सभी पर समान कार्रवाई होनी चाहिए थी। हालांकि उच्चाधिकारी सभी पर जांच के बाद विभागीय कार्रवाई की बात कह रहे हैं।
मनरेगा लोकपाल की ओर से ग्राम रोजगार सेवक के निलंबन और दो अधिकारियों पर विभागीय कार्रवाई की संस्तुति का पत्र मिला है। इस पर अब विभाग स्तर से जांच कर आगे की कार्रवाई की जाएगी। मामले में जिन लोगों पर जुर्माना लगाया गया है, उनके खिलाफ भी विभागीय जांच करवाई जाएगी। किसी भी प्रकार की गड़बड़ी बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
- वेद प्रकाश, डीडीओ हरिद्वार।