सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने के बड़े-बड़े दावों के बीच जमीनी सच्चाई यह है कि रुड़की के सिविल अस्पताल में सर्जन के चले जाने के बाद से मरीजों को ऑपरेशन योग्य इलाज मिलने के बजाय अन्य अस्पतालों में रेफर किया जा रहा है। इससे न केवल मरीजों की तकलीफ बढ़ रही है बल्कि कई मामलों में जान पर भी आफत बन आ रही है।
सिविल अस्पताल में पेट, आंतरिक चोट, अपेंडिक्स, पथरी, हर्निया और दुर्घटना से जुड़े मामलों में मरीजों को प्राथमिक उपचार के बाद यह कहकर भेज दिया जा रहा है कि यहां सर्जन उपलब्ध नहीं है। मजबूरी में परिजन मरीज को दूसरे सरकारी या निजी अस्पतालों की ओर ले जाने को विवश हो रहे हैं।
चौंकाने वाली बात यह है कि अस्पताल में ऑपरेशन थियेटर, बेड, नर्सिंग स्टाफ और अन्य संसाधन उपलब्ध हैं लेकिन सर्जन न होने के कारण ये सुविधाएं केवल कागजों तक सिमट कर रह गई हैं। शुक्रवार को अस्पताल पहुंचे मरीज का हर्निया का ऑपरेशन होना था लेकिन सर्जन न होने से उसे प्राथमिक उपचार देकर अन्य अस्पताल के लिए रेफर कर दिया गया था।
मरीज के तीमारदार संदीप का कहना है कि यदि अस्पताल में सर्जन तैनात होता है तो उन्हें बाहर भटकने की नौबत नहीं आती। अस्पताल में सर्जन डॉ़ प्रणम प्रताप सिंह अपनी सेवाएं दे रहे थे लेकिन नौ दिसंबर को उनके इस्तीफा देने के बाद से ऑपरेशन के लिए यहां पहुंच रहे मरीजों को रेफर किया जा रहा है।
अस्पताल प्रशासन की ओर से विभाग से सर्जन की मांग भी की गई लेकिन अब तक स्वास्थ्य विभाग के कानों पर जू नहीं रेंगती नजर आ रही है। इससे मरीजों को ऑपरेशन के लिए निजी या दूर-दराज के सरकारी अस्पतालों में भटकना पड़ रहा है। वहीं, सीएमएस डॉ. अरविंद कुमार मिश्रा ने बताया कि सर्जन की तैनाती नहीं होने से परेशानी हो रही है। इस बाबत उच्चाधिकारियों को अवगत कराया गया है।