गन्ने की बढ़वार के साथ अर्ली शूट बोरर का प्रकोप भी नजर आने लगा है। कई स्थानों पर अर्ली शूट बोरर के प्रकोप से फसल को नुकसान पहुंच रहा है। विशेषज्ञ किसानों को सावधानी बरतने और कीटनाशकों के छिड़काव की सलाह दे रहे हैं।
वसंतकालीन गन्ना बुआई के बाद इन दिनों बढ़वार का समय है लेकिन कई स्थानों पर पौधे धीरे-धीरे सूख रहे हैं और पत्तियां पीली पड़ रही हैं। साथ ही पौधे की बढ़वार भी धीमी हो रही है। यह अर्ली शूट बोरर का खतरा हो सकता है। अप्रैल से जून माह में फसल पर अर्ली शूट बोरर कीट का खतरा बढ़ जाता है। विशेषज्ञों के अनुसार, गन्ने में अर्ली शूट बोरर का प्रकोप अक्सर फसल की शुरुआती बढ़वार के समय होता है। यह कीट पौधे के कोमल तने के भीतर घुसकर उसे खोखला कर देता है।
कई बार किसान इसे फसल का रोग मान लेते हैं लेकिन इसे सही कीटनाशक से ही समाप्त किया जा सकता है। पत्तियों का सूखना और पौधे का बीच वाला हिस्सा कमजोर होना इस कीट की पहचान हैं। तने में बारीक छेद के साथ प्रभावित पौधे का अंदरूनी हिस्सा सड़ा हुआ और सिरके जैसी तेज गंध के साथ निकलता है। लक्सर शुगर मिल के प्रधान गन्ना प्रबंधक डॉ. बीएस तोमर के अनुसार, किसान खेत की लगातार निगरानी करें। प्रभावित पौधे को तत्काल अलग कर दें। समय पर सिंचाई और संतुलित उर्वरक के प्रयोग करना चाहिए। उन्होंने बताया कि कीट से बचाव और रोकथाम के लिए किसान कृषि विशेषज्ञ से सलाह लेकर सही कीटनाशक का इस्तेमाल करें। कीटनाशक की सही मात्रा का ध्यान रखना महत्वपूर्ण है। कीटनाशक का छिड़काव करते समय सावधानी बरतना आवश्यक है।